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उत्तराखंड: त्रिवेंद्र कैबिनेट ने एससी-एसटी और ओबीसी छात्र-छात्राओं को दी बड़ी राहत, पढें अन्य फैसले...

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 22 Jan 2021 10:14 PM IST

सार

  • राज्य के बजट से आठ करोड़ से ज्यादा का बजट जारी करने का निर्णय
  • यूपी के लिए आवंटित कर्मचारियों के लिए रखी शर्त, राज्य कैडर में रहेंगे तो नीचे रहेगी वरिष्ठता
  • संस्कृत शिक्षकों पर मेहरबानी, प्रबंधकीय शिक्षकों के मानदेय में बढ़ोतरी
  • उत्तरप्रदेश की दो कार्यदायी एजेंसियों को राज्य की सूची से बाहर किया
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : AMAR UJALA FILE PHOTO
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विस्तार

उत्तराखंड समाज कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा नौ तक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के 42 हजार से अधिक छात्रों को पिछले वर्षों से अटकी छात्रवृत्ति मिल सकेगी। प्रदेश मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को यह फैसला लिया।

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में समाज कल्याण विभाग के इस प्रस्ताव के तहत राज्य के बजट से आठ करोड़ 15 लाख 34 हजार रुपये जारी करने का निर्णय लिया गया। अब राज्य सरकार अपने बजट से इन छात्रों की छात्रवृत्ति देगी। अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के करीब वर्ष 2017-18 व 2018-19 के 22 हजार 492 छात्रों के लिए तीन करोड़ 79 लाख 19 हजार रुपये की धनराशि के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। जबकि ओबीसी के वर्ष 2018-19 के छह हजार और वर्ष 2019-20 के 14 हजार 142 छात्रों के लिए चार करोड़ 36 लाख 15 हजार रुपये मंजूर किए गए।


कैबिनेट ने कोविडकाल में छात्रवृत्ति के आवेदनों में 100 प्रतिशत भौतिक सत्यापन न होने के कारण जिलाधिकारी को अधिकार दिया कि वह रैंडम आधार पर 10 प्रतिशत सूची का सत्यापन करेंगे। साथ ही विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऑनलाइन फार्म भरने में यदि कोई गलती छूट जाती है तो आवेदन रद न किया जाए, बल्कि गलती सुधारने का अवसर दिया जाए।

शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि बैठक में कुल 16 प्रस्ताव आए, जिनमें से 15 पर निर्णय हुआ, जबकि एक प्रस्ताव स्थगित हुआ। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश राज्य के लिए आवंटित ऐसे कर्मचारी जो लंबे समय से उत्तराखंड में कार्यरत हैं, उन्हें यह लिखकर देना होगा कि वे उत्तराखंड कैडर में रहना चाहते हैं, लेकिन वरिष्ठता सूची में उन्हें उत्तराखंड मूल संवर्ग के कर्मचारियों से नीचे रहना होगा। ऐसा करने पर उनके वेतन या भत्तों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने दिया जाएगा।

ये फैसले भी हुए

- हरिद्वार में ध्यानकुंज के समीप साधु संतों की भू समाधि के लिए सिंचाई विभाग की 4.384 हैक्टेयर भूमि दी जाएगी ।
- अल्मोड़ा में चौबटिया में दिगौत में केंद्रीय विद्यालय बनेगा। सिंचाई खंड की भूमि 0.206 हैक्टेयर भूमि निशुल्क आबंटित होगी।
- पर्यटन विकास परिषद में तकनीकी कर्मचारियों की छह पदों की मंजूरी। 
- राज्य औषधि नियंत्रक सेवा नियमावली को मंजूरी।
- कोविड में ली गई 140 एंबुलेंस का संचालन मैसर्स कैंप संस्था करेगी। कुंभ में काम आएंगी ये एंबुलेंस। 132 एंबुलेंस पहुंची।

निकाय में घर होने पर भी जिपं अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख सदस्यता नहीं जाएगी
परिसीमन के कारण जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के अध्यक्षों, ब्लाक प्रमुखों, व सदस्यों के घर यदि शहरी निकाय में आए हैं तो उनकी सदस्यता समाप्त नहीं होगी। प्रदेश मंत्रिमंडल ने पंचायती राज अधिनियम के तहत संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कौशिक के मुताबिक, जब वे चुने गए थे, तब वे उनके घर ग्रामीण क्षेत्र में थे।   

कुंभ के कार्य को कई हिस्सों में बांटने का अधिकार
कैबिनेट ने आयुक्त और मेलाधिकारी को कुंभ गतिमान और अस्थाई कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए उनके अधिकारों में बढ़ोतरी की है। वे एक कार्य को कई हिस्सों में बांट सकेंगे। उन्हें एक सप्ताह के भीतर टेंडर करने होंगे। स्वीकृत गतिमान कार्यों में आवश्यकता होने पर वे 50 प्रतिशत खर्च की सीमा स्वयं बढ़ा सकेंगे। राज्य सरकार ने आयुक्त को पांच करोड़ और मेलाधिकारी को दो करोड़ के काम कराने का अधिकार पहले ही दे रखा है।

यूपी की दो कार्यदायी संस्थाएं बाहर, आरईएस को 10 करोड़ के काम

कैबिनेट ने अपनी कार्यदायी संस्था की सूची से यूपी राजकीय निर्माण निगम और यूपी समाज कल्याण निर्माण निगम को बाहर कर दिया है। राज्य की सूची में 21 कार्यदायी संस्थाएं हैं। साथ ही कैबिनेट ने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग(आरईएस) को अब पांच करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ तक के कार्य करने का अधिकार दे दिया है। आरईएस शहरी निकाय व प्राधिकरण के कार्यों में सैंटेज नहीं लेगा।

अशासकीय स्कूलों और कॉलेजों के संस्कृत शिक्षकों का मानदेय बढ़ेगा 
प्रदेश के अशासकीय स्कूल और कॉलेजों के संस्कृत के शिक्षकों का मानदेय बढ़ेगा। बृहस्पतिवार को कैबिनेट की बैठक में इसके प्रस्ताव को पास किया गया। कहा गया कि संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यह निर्णय लिया गया है। 

प्रदेश में अशासकीय स्कूलों में पढ़ा रहे संस्कृत के शिक्षकों को अब तक दस हजार रुपये मानदेय मिलता था, लेकिन अब पांच साल से बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को 15 हजार रुपये मानदेय मिलेगा।

जबकि पांच से दस साल से पढ़ा रहे शिक्षकों को 25 हजार रुपये एवं दस साल से अधिक समय से पढ़ा रहे शिक्षकों को 30 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। इसके अलावा जो शिक्षक यूजीसी के मानक के अनुसार पीएचडी और एमफिल करने वाले हैं उन्हें पांच हजार रुपये हर महीने अतिरिक्त मानदेय दिया जाएगा। 
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