उत्तराखंड की बेटी सृष्टि की फिल्म 'एक था गांव' मामी फिल्म महोत्सव की इंडिया गोल्ड श्रेणी में हुई शामिल

संदीप थपलियाल, अमर उजाला, श्रीनगर(पौड़ी) Updated Tue, 06 Oct 2020 02:30 AM IST
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सृष्टि लखेड़ा
सृष्टि लखेड़ा - फोटो : अमर उजाला

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सार

  • मुंबई एकेडमी ऑफ मूविंग इमेज फिल्म महोत्सव में बनाई ‘एक था गांव’ ने जगह
  • पलायन की कश्मकश को बया करती है फिल्म

विस्तार

उत्तराखंड के टिहरी जिले के सेमला गांव की सृष्टि लखेड़ा की फिल्म ‘एक था गांव’ (वंस अपॉन ए विलेज) ने मुंबई एकेडमी ऑफ मूविंग इमेज (मामी) फिल्म महोत्सव के इंडिया गोल्ड श्रेणी में जगह बनाई है।
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गढ़वाली और हिंदी भाषा में बनी इस फिल्म में घोस्ट विलेज (पलायन से खाली हो चुके) की कहानी है। सृष्टि की फिल्म का मुकाबला विभिन्न भाषाओं की चार फिल्मों के साथ है। पहले मुंबई फिल्म महोत्सव का आयोजन इसी महीने होना था, लेकिन कोविड संकट के चलते इसका आयोजन अगले साल होगा। 
मूल रूप से विकास खंड कीर्तिनगर के सेमला गांव की रहने वाली सृष्टि का परिवार ऋषिकेश में रहता है। वह पिछले 10 सालों से फिल्म लाइन के क्षेत्र में हैं। उत्तराखंड में पलायन की पीड़ा को देखते हुए  सृष्टि ने पावती शिवापालन के साथ (सह निर्माता) फिल्म बनाने का निर्णय लिया।
इसके लिए उन्होंने अपने गांव का चयन किया। सृष्टि बताती है कि पहले उनके गांव में 40 परिवार रहते थे और अब पांच से सात लोग ही बचे हैं। गांव वालों को किसी न किसी मजबूरी से गांव छोड़ना पड़ा है। इसी उलझन को उन्होंने एक घंटे की फिल्म के रूप में पेश किया है। 
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