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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिले सीएम, महाकुंभ के लिए मांगी 5000 करोड़ की राशि

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 16 Jun 2019 10:32 AM IST
निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो)
निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो) - फोटो : Instagram
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उत्तराखंड ने 2021 में हरिद्वार में प्रस्तावित महाकुुंभ के लिए केंद्र सरकार से 5000 करोड़ की एकमुश्त धनराशि देने का अनुरोध किया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ दिल्ली में मुलाकात के दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एकमुश्त धनराशि के औचित्य को समझाया। उन्होंने नमामि गंगे परियोजना के 802 करोड़ 95 लाख के प्रस्तावों की मंजूरी के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भी मुलाकात की। 
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान सीएम ने महाकुंभ के आयोजन से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में हरिद्वार में महाकुंभ में देश-विदेश से 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। मेले में अवस्थापना सेवाओं और सुविधाओं, विशेषकर आवास, परिवहन, स्वास्थ्य, स्वच्छता व सुरक्षा आदि में विस्तार करना जरूरी है। ताकि मेले का सफल आयोजन सुनिश्चित हो सके। संबंधित विभागों के स्तर पर अवस्थापना सेवाओं और सुविधाओं के विकास के लिए लगभग 5000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव उपलब्ध कराए गए हैं। सभी स्थायी व अस्थायी कार्य अक्तूबर 2020 तक पूर्ण कराया जाना आवश्यक है। उत्तराखंड राज्य के सीमित आर्थिक संसाधनों को देखते हुए महाकुंभ के लिए वनटाइम ग्रांट की यथाशीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए। केंद्रीय मंत्री ने मेले के सफल आयोजन के लिए हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

दूसरी तरफ, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि नमामि गंगे परियोजना के 802 करोड़ 95 लाख के प्रस्तावों को जल्द से जल्द मंजूर किया जाए। उन्होंने सिंचाई विभाग में अवशेष केंद्रांश 142 करोड़ 52 लाख रुपये और लघु सिंचाई विभाग में केंद्र पोषित योजनाओं को पूर्ण करने के लिए अवशेष धनराशि 63 करोड़ 57 लाख रुपये यथाशीघ्र अवमुक्त करने का भी आग्रह किया। नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत केदारपुरी क्षेत्र में 67 करोड़ 64 लाख रुपये लागत से सीवेज प्रबंधन, गंगा की सहायक नदियों सुसवा, कोसी, ढेला, कल्याणी, भेला, पिलाखर, नन्दौर व किच्छा में गिरने वाले नालों के प्रदूषित जल के उपचार के लिए 545 करोड़ 14 लाख रुपये लागत की आठ परियोजनाएं, काशीपुर आई एंड डी,  एसटीपी की 97 करोड़ 79 लाख रुपये लागत की परियोजना, केदारनाथ यात्रा के दृष्टिगत महत्वपूर्ण 21 करोड़ 62 लाख रुपये लागत की गौरीकुंड सीवेज परियोजना, अगस्त्यमुनि की 27 करोड़ 17 लाख रुपये लागत की आई एंड डी, एसटीपी परियोजना व शारदा नदी में हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए 43 करोड़ 49 लाख रुपये लागत की टनकपुर सीवेज आई एंड डी व एसटीपी के कार्य शामिल हैं। 

महाकुंभ से पहले हरिद्वार रिंग रोड व गंगा पर चार लेन पुल करें मंजूर 
हरिद्वार महाकुंभ से पहले रिंग रोड व गंगा नदी पर जगजीतपुर (कनखल) के पास 2.5 किमी. स्पान के चार लेन पुल का निर्माण आवश्यक है। ताकि महाकुंभ के आयोजन में कोई समस्या नहीं हो। यह मांग शुक्रवार को केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रखी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 17 राज्यमार्गों को भी नेशनल हाईवे घोषित किया जाए। इसके साथ ही चारधाम परियोजना के अंतर्गत सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत ऋषिकेश बाईपास के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि का मुआवजा भी केंद्र सरकार की तरफ से दिया जाए। 

शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री से भेंट कर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय सड़क निधि के तहत प्रदेश में करीब 454 करोड़ की लागत के 19 योजनाओं को स्वीकृति दी जाए। वर्ष 2021 में हरिद्वार में महाकुंभ का आयोजन किया जाना है। इसमें संभावित यातायात के दबाव से निपटने के लिए हरिद्वार शहर में रिंग रोड का निर्माण करना बहुत जरूरी है। 47 किलोमीटर लंबे रिंग रोड के निर्माण पर 1566 करोड़ रुपये की लागत आने का आकलन किया गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से इसकी डीपीआर प्रदेश के मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत करते हुए सर्वे कर लिया गया है। अब इसके निर्माण की स्वीकृति केंद्र सरकार से मिलनी है। हरिद्वार में यातायात के दबाव को कम करने के लिए गंगा नदी पर जगजीतपुर (कनखल) के पास 2.5 किमी. स्पान के चार लेन पुल का निर्माण भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने चार धाम परियोजना के तहत ऋषिकेश में लगभग 17 किमी. का बाईपास सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत किया है। इस बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहण की लागत लगभग 250 करोड़ रुपये है। जिस तरह से चारधाम मार्ग परियोजना में भूमि अधिग्रहण की लागत केंद्र की ओर से वहन की जा रही है। उसी तर्ज पर इस 17 किमी. ऋषिकेश बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहण का मुआवजा भी केंद्र से दिया जाए। केंद्र्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि मंत्रालय उत्तराखंड को हरसंभव मदद देने के लिए तत्पर है।

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