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लीज की भूमि पर मालिकाना हक का रास्ता साफ, जानिए कैबिनेट के 12 बड़े फैसले

न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 14 Feb 2018 10:48 PM IST
trivendra singh rawat
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कैबिनेट के फैसले के बाद अब लीज पर ली गई भूमि पर मालिकाना हक का रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश मंत्रिमंडल ने बुधवार को हुई बैठक में नई नजूल नीति को मंजूरी दे दी है। इसमें 90 साल की लीज पर ली गई भूमि के मालिकाना हक का रास्ता साफ हो गया है।
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प्रदेश में 2.41 लाख वर्ग मीटर नजूल भूमि पर काबिज लोगों के लिए सर्किल रेट के आधार पर शुल्क की अलग-अलग दरें तय कर दी गई हैं। नजूल की भूमि को फ्री होल्ड करके सरकार ने लगभग दो हजार करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। नजूल की भूमि को फ्री होल्ड कराने के लिए कब्जाधारकों को छह माह का वक्त दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई बैठक में 16 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। जिसमें सबसे अहम प्रस्ताव नई नजूल नीति को मंजूरी प्रदान किया जाना है। 1900 से 1920 के बीच विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं को 90 वर्ष के लिए पट्टे पर नजूल की भूमि दी गई थी।

नजूल भूमि का प्रत्येक 30 वर्ष पर नवीनीकरण कराए जाने की व्यवस्था की गई थी। राज्य गठन से पहले और राज्य गठन के बाद कई नजूल भूखंडों को फ्री होल्ड करने की कोशिश की गई, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। सरकार 2009 में नजूल नीति भी लेकर आई थी, लेकिन नीति में अस्पष्टता होने की वजह से फ्री-होल्ड के प्रकरणों का निरस्तारण नहीं हो सका था।
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स्टार्ट अप नीति को मंजूरी

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