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Uttarakhand: पेपर लीक मामले के बाद अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के चेयरमैन एस राजू ने दिया इस्तीफा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 05 Aug 2022 11:57 PM IST
सार

आयोग के चेयरमैन एस राजू ने पेपर लीक मामले में धांधली को लेकर नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया है। वे 2016 से चेयरमैन के पद पर तैनात थे। सितंबर में उनका कार्यकाल समाप्त होने वाला था।

यूकेएसएसएससी के चेयरमैन एस राजू ने दिया इस्तीफा
यूकेएसएसएससी के चेयरमैन एस राजू ने दिया इस्तीफा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले के बाद आज उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग(यूकेएसएसएससी) के अध्यक्ष एस राजू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पेपर लीक मामले में धांधली को लेकर नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया है। वे 2016 से चेयरमैन के पद पर तैनात थे। सितंबर में उनका कार्यकाल समाप्त होने वाला था। बता दें कि इससे पहले अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष रहे आरबीएस रावत ने भी 2016 में पेपर लीक विवाद के बाद पद से इस्तीफा दे दिया था।



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एस राजू ने कहा कि उनके कार्यकाल में आयोग ने अब तक 88 परीक्षा कराई हैं। जिसमें से दो में गड़बड़ी सामने आई। पहले फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा में धांधली सामने आई थी। तब भी आयोग ने जांच बैठाई थी। अब स्नातक स्तरीय परीक्षा में धांधली सामने आई तो भी आयोग ने मामले को छिपाने के बजाय स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला सरकार के समक्ष लाया है। उन्होंने कहा कि आयोग को 100 कर्मचारियों की जरूरत है, लेकिन यहां केवल 35 उपलब्ध हैं। इसके बावजूद स्नातक स्तरीय परीक्षा में अभी तक आयोग के किसी भी अधिकारी-कर्मचारी का नाम न आना उनकी पारदर्शिता को बया करता है। गौरतलब है कि एस राजू 1984 बैच के आईएएस हैं। उन्होंने अपर मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद 23 सितंबर 2016 को आयोग में अध्यक्ष पद संभाला था। सितंबर में उनका कार्यकाल पूरा हो रहा था लेकिन उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया।

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ये है पूरा मामला

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने स्नातक स्तरीय परीक्षा गत वर्ष दिसंबर में कराई थी। इसके बाद से ही लगातार इसमें धांधली की बात सामने आ रही थी। बीती 22 जुलाई को मुख्यमंत्री के निर्देश पर रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। तब इसकी जांच एसटीएफ को सौंपी गई। इसके बाद से ही एसटीएफ कड़ियां जोड़कर पूरे मामले की जांच में जुटी है।


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टेलीग्राम एप पर किया था पेपर लीक

परीक्षा का पेपर लीक करने वाले को भी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। यह भी आयोग की आउटसोर्स कंपनी आरएमएस सॉल्यूशन का कर्मचारी था। इसकी जिम्मेदारी पेपर छपने के बाद सील करने की थी, लेकिन शातिर ने तीनों पालियों के एक-एक सेट को टेलीग्राम एप के माध्यम से अपने साथियों को भेज दिया। इस काम के लिए उसे 36 लाख रुपये मिले थे।

अब तक 13 लोग हो चुके गिरफ्तार

इस मामले में अब तक 13 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। कई और लोग भी राडार पर हैं। एक-दूसरे से तार जुड़ रहे हैं। सभी लोग एक-दूसरे के संपर्क में थे। मामले की विवेचना जारी है। जल्द ही कुछ और खुलासे किए जा सकते हैं।

करीब एक लाख नंबर लिए गए सर्विलांस पर 

पहले दिन से ही एसटीएफ की सर्विलांस टीम काम में जुटी हुई है। अब तक एक लाख से अधिक मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लिया जा चुका है। इनसे कई सुराग भी मिले हैं। इनकी तस्दीक की जा रही है। आरोपियों ने अन्य लोगों से लगातार बात की है। किन-किन लोगों से पेपर बेचने के लिए संपर्क किया गया है, इस बारे में पता किया जा रहा है। पहाड़ के कुछ युवाओं से भी संपर्क की बात सामने आ रही है।

इस्तीफे की जानकारी देते हुए भावुक अध्यक्ष एस राजू

इस्तीफे की जानकारी देते हुए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एस राजू कई बार भावुक हो गए। अपने ऊपर उठ रहे सवालों से आहत राजू ने कहा, मुझे यह सब अच्छा नहीं लगा।
उत्तराखंड सरकार में लंबे समय तक बतौर आईएएस अपनी सेवाएं दे चुके एस राजू शुक्रवार को इस्तीफा देते हुए अपने आंसू नहीं रोक पाए। वह एक ओर जहां अपने ऊपर उठ रहे सवालों से आहत हैं तो दूसरी ओर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत के आयोग को भंग करने के बयान से भी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि ब्लूटूथ से पेपर लीक का पटाक्षेप करने पर जिस मुख्यमंत्री ने उनकी पीठ थपथपाई थी, आज ऐसा बयान देने से पहले उन्होंने एक बार भी आयोग का पक्ष जानने की कोशिश नहीं की। कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर उनसे इस संबंध में बात करेंगे।

उन्होंने कहा कि तमाम नेताओं के दबाव और सिफारिशें आईं लेकिन उन्होंने कभी भर्तियों में कोई समझौता नहीं किया। आयोग कितना पारदर्शी है, इसकी जानकारी उनसे लेनी चाहिए, जिन्हें नौकरी मिल चुकी है। बोले कि उनका कभी किसी नेता से कोई नाता नहीं रहा। अगर कोई अब उनके चरित्र पर सवाल उठा रहा है तो वह इसे महसूस कर रहे हैं। आंसुओं को काबू करते हुए बोले कि उन्हें यह सब अच्छा नहीं लगा। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नकल माफिया आयोग के अधिकारियों को जबर्दस्ती टारगेट कर रहे हैं।

जाते-जाते नकल माफियाओं पर कस गए नकेल

स्नातक स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक के बीच विदा हुए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एस राजू जाते-जाते नकल माफियाओं पर नकेल कस गए। आयोग ने नकलरोधी कानून का प्रस्ताव पास कर शासन को भेज दिया है। अब सरकार को इस पर निर्णय लेना है।

स्नातक स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक प्रकरण में साइबर सेल की रिपोर्ट आने के बाद आयोग ने हाल ही में नए नकलरोधी कानून का प्रस्ताव पास किया है। इस कानून में नकल माफियाओं के लिए सख्त सजा के प्रावधान किए गए हैं। यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। इसमें नकल व पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग करने पर परीक्षार्थी को पांच साल तक का कारावास, कम से कम एक लाख रुपये जुर्माना और दस साल तक के लिए परीक्षाओं से प्रतिबंधित करने का प्रावधान किया गया है।

वहीं, सेवा प्रदाता, शिक्षण संस्थान, परीक्षा संस्था या अन्य की ओर से सांठगांठ कर अनुचित साधनों का प्रयोग करने पर दस साल की जेल, दस करोड़ रुपये तक जुर्माना, सार्वजनिक परीक्षा से अर्जित की गई संपत्ति की कुर्की और परीक्षा की पूरी लागत की वसूली का प्रावधान किया गया है। आयोग के अध्यक्ष एस राजू ने बताया कि यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। अब सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सभी परीक्षाओं में यह लागू हो जाएगा।

गड़बड़ी रोकने को दो स्तर की परीक्षा

आयोग ने एस राजू की अध्यक्षता में यह भी फैसला लिया है कि परीक्षा को द्विस्तरीय बनाया जाएगा। पहले प्रारंभिक परीक्षा होगी और इसके बाद मुख्य परीक्षा होगी। प्रारंभिक परीक्षा ऑनलाइन और मुख्य परीक्षा ऑफलाइन होगी। चूंकि नकल संबंधी नियमों पर निर्णय राज्य सरकार का विषय है, इसलिए यह प्रस्ताव भी सरकार को भेज दिया गया है।
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