उत्तराखंड: सतत विकास लक्ष्य में पिछड़ा देहरादून शहर, देश के 56 शहरों में मिला 35वां स्थान

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 25 Nov 2021 08:06 PM IST

सार

नीति आयोग ने वर्ष 2021-22 के लिए अर्बन इंडेक्स जारी किया है। इसमें देश भर से 56 शहरों को शामिल किया गया। 
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नीति आयोग - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

नीति आयोग की ओर से जारी सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) अर्बन इंडेक्स में देहरादून शहर पिछड़ा है। देश के 56 शहरों में दून को 35 वां स्थान मिला है। जबकि पड़ोसी राज्य हिमाचल का शिमला शहर देश भर में पहले स्थान पर रहा।
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नीति आयोग ने वर्ष 2021-22 के लिए अर्बन इंडेक्स जारी किया है। इसमें देश भर से 56 शहरों को शामिल किया गया। हाल ही में शहरी विकास मंत्रालय की ओर से जारी स्वच्छ सर्वेक्षण में देहरादून ने रैंकिंग में सुधार किया था। एसडीजी अर्बन इंडेक्स में पिछड़ गया है। इसमें देहरादून की स्थिति औसत से काफी नीचे रही है। कोयंबटूर ने दूसरा और चंडीगढ़ तीसरे स्थान पर हैं। उत्तराखंड से केवल देहरादून शहर को ही इस इंडेक्स में शामिल किया गया। 


क्या है एसडीजी इंडेक्स
सतत विकास लक्ष्य को स्थानीय स्तर पर लागू करने के लिए नीति आयोग ने यह इंडेक्स जारी किया है। स्थानीय स्तर पर डाटा आधारित सोच और सिटी मानीटरिंग तंत्र को विकसित करने के लिए नीति आयोग की यह रैंकिंग एसडीजी के 46 लक्ष्य और 77 इंडिकेटर्स के आधार पर की है। इसके लिए शहरों को शून्य से 100 तक अंक दिए गए हैं। प्रदेश के शहर आर्थिक विकास में इंजन का काम करते हैं। आयोग का मानना है की शहरों को समग्र और संतुलित विकास के लिए डाटा आधारित निर्णय लेने की जरूरत है। 

औसत से नीचे देहरादून
एसडीजी इंडेक्स में देहरादून का प्रदर्शन औसत से कम रहा है। देहरादून ने 63.71 अंक हासिल किए। जबकि हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला 75.50 अंक लेकर देश भर में पहले स्थान पर है। 73.29 अंक के साथ कोयंबटूर दूसरे और 72.36 अंक लेकर चंडीगढ़ तीसरे स्थान पर है। देश के 34 शहरों ने सतत विकास गोल को स्थानीय स्तर पर लागू करने के मामले में देहरादून से बेहतर किया है और 21 शहरों की स्थिति देहरादून की तुलना में खराब रही है।

दून को किस गोल में कितने अंक

देहरादून को सभी के लिए सुलभ और स्वच्छ ईंधन गोल में सबसे ज्यादा 96 अंक मिले हैं, जबकि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किए गए उपायों में देहरादून काफी पीछे है। इस गोल में सबसे कम सिर्फ 31 अंक मिले हैं। इसके अलावा शांति सभी के लिए न्याय व जवाबदेह संस्थाओं के निर्माण में दून को 80 अंक, लैंगिक समानता में 79, प्रोडक्शन पैटर्न सुनिश्चित करने में 78, साफ पानी और स्वच्छता में 77, गुणवत्ता शिक्षा में 72, गरीबी उन्मूलन, आर्थिक विकास, स्वास्थ्य के लिए किए गए कार्य में 59-59 अंक, असमानता कम करने के लिए 58, शहरों को सतत बनाने के लिए 52, इनोवेशन और अवस्थापना विकास के लिए 47 और भूखमरी कम करने के लिए 45 अंक मिले हैं। 

शहरी विकास में आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय पहलुओं पर काम करने की जरूरत
सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल का कहना है कि आज हम शहरीकरण के उस दौर में हैं, जहां बात सिर्फ विकास की नहीं, सतत विकास की है। हमें अब शहरी विकास के सभी पहलू जैसे आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय पहलू पर काम करने की जरूरत है। इसके लिए हमें आंकड़ों की जरूरत होती है। अर्बन इंडेक्स का यही उद्देश्य है। उनका कहना है की अब जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को विकास के नए पैमाने के अनुसार खुद को ढालना और अपडेट करना होगा।

अर्बन इंडेक्स में देहरादून को जलवायु परिवर्तन पर सबसे कम अंक मिलना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा की देहरादून की पहचान उसके पर्यावरण और जलवायु के कारण है और सरकार, शहरी विकास विभाग, नगर निगम देहरादून और अन्य सभी विभागों को इंडेक्स के सभी पहलुओं पर गहन चिंतन कर भविष्य की शहरी नीतियों पर कार्य करना चाहिए।
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