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UKSSSC Paper Leak Case: एक कड़ी के बूते आगे नहीं बढ़ रही जांच, गिरफ्तार होने वाला हर शख्स कर रहा नए खुलासे

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Thu, 18 Aug 2022 10:59 AM IST
सार

22 जुलाई को मुकदमा दर्ज होने के बाद एसटीएफ ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक की जांच शुरू की थी। गिरफ्तार होने वाला हर शख्स नए खुलासे कर रहा है। ऐसे में जांच किसी एक कड़ी के सहारे आगे नहीं बढ़ रही है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
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विस्तार

पेपर लीक मामले में किसी एक कड़ी के बूते जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। गिरफ्तार होने वाला हर शख्स नए खुलासे कर रहा है। ऐसे में जांच कई दिशाओं में आगे बढ़ रही है। एसटीएफ की आठ टीमों को अलग-अलग दिशाओं में जांच के लिए लगाया गया है।



22 जुलाई को मुकदमा दर्ज होने के बाद एसटीएफ ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक की जांच शुरू की थी। तीन दिन बाद ही छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पहले लगा कि इनमें से ही किसी ने पेपर लीक किया और अपने-अपने संपर्कों में बांटा।


पूछताछ और जांच के बाद देहरादून के दो उपनल कर्मचारी नेताओं का नाम सामने आया। आरोपियों से पता चला कि उन्होंने सेलाकुई में रहते हुए वहां के कुछ अभ्यर्थियों को नकल कराई। कुछ पास हुए और कुछ फेल, लेकिन अब तक पकड़े गए लोगों ने किसी एक का नाम नहीं बताया।

एक नई टीम को उत्तर प्रदेश में नकल माफिया के पीछे लगाया गया
इसके बाद एसटीएफ ने तीन टीमों का गठन किया। एक गढ़वाल, दूसरी हरिद्वार क्षेत्र और तीसरी टीम ऊधमसिंह नगर में जांच करने लगी। यहां से जब आरोपियों की गिरफ्तारी हुई तो प्रिंटिंग प्रेस का अभिषेक वर्मा पकड़ में आया। पता चला कि उसने पेपर सेट से एक पेपर निकालकर टेलीग्राम से अपने साथी मनोज जोशी को भेजा था, लेकिन अब तक किसी बड़े आरोपी का नाम सामने नहीं आया था।

इस बीच गढ़वाल में जांच कर रही टीम को कुछ अभ्यर्थियों से पता चला कि उनका संपर्क हाकम सिंह से था। हाकम सिंह से पूछताछ हुई तो धामपुर का नाम सामने आया। अब अलग-अलग दिशाओं में जांच के लिए आठ टीमों को लगाया गया है। एक नई टीम को उत्तर प्रदेश में नकल माफिया के पीछे लगाया गया है।

एक-दूसरे से नहीं मिले हैं सभी आरोपी

एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में सभी आरोपी एक-दूसरे से पहले नहीं मिले हैं। हर कोई अपना अलग गिरोह चलाता है। यही कारण है कि जो भी पकड़ा जाता है, वह नए राज खोल रहा है। सबके अपने-अपने क्षेत्रों में अभ्यर्थी हैं। सूत्रों के मुताबिक, इनमें मनोज जोशी और अभिषेक वर्मा ही सबकी कड़ी बने हैं। इन्होंने ही हर गिरोह को किसी न किसी के माध्यम से पेपर मुहैया कराए हैं।

‘फोटो लगाने से कोई नहीं बचेगा, अपराधी की जगह जेल’
देहरादून। डीजीपी अशोक कुमार ने कहा है कि किसी अधिकारी के साथ फोटो लगाने से कोई अपराधी बच नहीं सकता। पेपर लीक मामले में कोई अपराधी न वीआईपी है और न ही हाईप्रोफाइल। उसकी एक ही जगह है, जेल। डीजीपी का यह बयान उनकी हाकम सिंह रावत के साथ फोटो वायरल होने के बाद आया है।

पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने तीन दिन पहले उत्तरकाशी के जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह रावत को गिरफ्तार किया था। उसे उत्तरकाशी जिले में इस परीक्षा में हुई नकल का सूत्रधार बताया जा रहा है। उसकी कई नामी और बेनामी संपत्ति भी उत्तरकाशी जिले में है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी तमाम चर्चाएं हो रही हैं। इस बीच हाकम सिंह की कई अधिकारियों और नेताओं के साथ फोटो भी वायरल हुई।

इनमें से एक फोटो डीजीपी अशोक कुमार के साथ भी है। दो दिन से यह फोटो तमाम सोशल साइट्स और पोर्टलों पर चल रही है। इसके बाद बुधवार को डीजीपी ने इस संबंध में बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि कोई किसी अधिकारी या नेता के साथ फोटो खिंचवाने से निर्दोष साबित नहीं हो जाता। जो अपराधी होता है, उसके लिए एक ही जगह है, वह है जेल। पुलिस इस मामले में बेहतर काम कर रही है। आगे भी अपराधियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
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