‘खाकी में इंसान’ को चरितार्थ करते हैं आईपीएस अशोक कुमार, तराई के अपराध को खत्म करने में अहम भूमिका

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 21 Nov 2020 10:59 AM IST
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अशोक कुमार
अशोक कुमार - फोटो : अमर उजाला (File Photo)

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आईपीएस अशोक कुमार अपनी पुस्तक ‘खाकी में इंसान’ के शीर्षक को चरितार्थ करते हैं। सरल स्वभाव और मृदुभाषी अशोक कुमार अलग कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। पुलिस के कठोर चरित्र से निकलकर हर किसी की मदद को आतूर रहते हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने सेवाकाल में कई चुनौतीपूर्ण कार्य भी किए।
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इनमें चाहे सेवा के शुरूआती काल में अपराध से लड़ना हो या फिर अब प्रदेश की कानून व्यवस्था को संभालना। नैनीताल, रुद्रपुर, हरिद्वार आदि जगहों पर रहते हुए उन्होंने तराई के अपराध को खत्म करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आईपीएस अशोक कुमार की पहली पोस्टिंग उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में बतौर एएसपी हुई थी। विभाग के लिए उनके समर्पण भाव को हर कोई जानता है, लेकिन उनके मानवीय पहलू से हर वह पीड़ित वाकिफ है जो इनके दर पर अपनी पीड़ा लेकर पहुंचा। क्योंकि, आईपीएस अशोक कुमार ने हर पीड़ित की उसकी उम्मीद से बढ़कर मदद की। 
तीन दशकों में इलाहाबाद के बाद अलीगढ़, रुद्रपुर, चमोली, हरिद्वार, शाहजहांपुर, मैनपुरी, नैनीताल, रामपुर, मथुरा, पुलिस मुख्यालय देहरादून, गढ़वाल और कुमाऊं रेंज में वे अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। इनके अलावा आईपीएस अशोक कुमार सीआरपीएफ और बीएसएफ में भी प्रतिनियुक्ति पर रह चुके हैं। इन सभी जगहों पर उन्होंने अपने व्यक्तित्व की अमिट छाप छोड़ी। अशोक कुमार वर्तमान में डीजी कानून व्यवस्था उत्तराखंड के पद पर हैं। वे 30 नवंबर को डीजीपी उत्तराखंड का पदभार ग्रहण करेंगे। 
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