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EXCLUSIVE: महंगा होगा फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में ठहरना, जंगल सफारी के लिए देने होंगे ज्यादा दाम, बस इन्हें मिलेगी छूट

विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 29 Jun 2022 09:16 AM IST
सार

वन विभाग ने संशोधित शुल्क निर्धारण का प्रस्ताव शासन को भेजा है। जिसके बाद प्रदेश में ईको टूरिज्म के तहत होने वाली गतिविधियां महंगी हो जाएंगी। पांच से दस प्रतिशत तक दाम बढ़ाए जा सकते हैं, जबकि कुछ के कम होंगे

सीएम पुष्कर सिंह धामी
सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार

आने वाले दिनों में वन विभाग के गेस्ट हाउस में ठहरना और जंगल सफारी का आनंद लेने के लिए अधिक दाम चुकाने पड़ सकते हैं। वन विभाग की ओर से ईको टूरिज्म और पर्यावरण पर्यटन से जुड़ी तमाम गतिविधियों का शुल्क बढ़ाए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।



इसके तहत पांच से 10 प्रतिशत तक शुल्क में बढ़ोतरी की जा सकती है। दूसरी तरफ फिल्म, डॉक्युमेंट्री निर्माण, पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों का शुक्ल घटाया भी जा सकता है।  प्रदेश में छह राष्ट्रीय उद्यान, सात वन्य जीव विहार और चार संरक्षित वन क्षेत्र हैं। इसके अलावा वन क्षेत्रों में 14 ईको टूरिज्म क्षेत्र हैं। जहां वर्षभर पर्यटकों की आमद रहती है। 


इनमें वन्य जीव सफारी, कैंपिंग, हाईकिंग, बर्ड वॉचिंग, एंग्लिंग, नेचर वॉक, बटरफ्लाई वॉचिंग और ग्रामीण पर्यटन गतिविधियां संचालित की जाती हैं। अच्छी बात यह है कि बीते कुछ वर्षों में इन गतिविधियों के तहत पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्रदेश सरकार को ईको टूरिज्म और पर्यावरण आधारित पर्यटन से कुल 17.38 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसमें सबसे अधिक कमाई कॉर्बेट टाइगर रिजर्व ने करके दी है। 

मुख्य वन संरक्षक ईको टूरिज्म डॉ. पराग मधुर धकाते ने बताया कि जिन गतिविधियों में शुक्ल बढ़ाया जा सकता है, उनमें गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम, वाइल्ड लाइफ सफारी, एंग्लिंग, वाहनों की एंट्री, फोटोग्राफी, प्रतिव्यक्ति एंट्री शुक्ल आदि शामिल हैं। इसके अलावा कुछ ट्रैकिंग रूट, बर्ड वाचिंग, नेचर ट्रैल आदि पर पहली बार शुक्ल लगाया जा सकता है। 

13 साल बाद बढ़ेगा शुक्ल 

प्रदेश के लिए ईको टूरिज्म कम दाम में अधिक मुनाफे वाला जैसा सौदा है लेकिन पिछले 13 सालों से शुल्क निर्धारण में कोई संशोधन ही नहीं किया गया। वर्ष 2009 में आखिरी बार संबंधित गतिविधियों का शुल्क निर्धारित किया गया था। इधर, मुख्य वन संरक्षक ईको टूरिज्म डॉ. पराग मधुर धकाते ने बताया कि ईको टूरिज्म के तहत लिए जाने वाले शुक्ल का निर्धारण कर लिया गया है। फाइल शासन को भेज दी है। संभवत: अगले माह तक नई दरें लागू कर दी जाएंगी।

प्रदेश में चिह्नित ईको टूरिज्म क्षेत्र 

धनोल्टी ईको पार्क (टिहरी), सिमतोला ईको पार्क (अल्मोड़ा), कौड़िया ईको पार्क (टिहरी), लच्छीवाला नेचर पार्क (देहरादून), नीर झरना (ऋषिकेश), हिमालय बॉटेनिकल गार्डन (नैनीताल), संजय वन (हल्द्वानी), चौरासी कुटिया (राजाजी टाइगर रिजर्व), जीबी पंत हाई एल्टीट्यूड जू (नैनीताल), देहरादून जू-हर्बल गार्डन, ईको पार्क (मुनस्यारी), कॉर्बेट न्यूजिम (कालाढूंगी), कॉर्बेट फॉल (रामनगर), बराती राव (रामनगर)। 

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प्रदेश में कई सालों से ईको टूरिज्म के तहत निर्धारित शुक्ल में संशोधन नहीं हुआ है। अब इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। इसमें कुछ गतिविधियों के दाम बढ़ाए जाने तो कुछ के कम किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। शुक्ल निर्धारण पर अंतिम फैसला शासन को लेना है। 
- विनोद कुमार सिंघल, वन प्रमुख, पीसीसीएफ (हॉफ)
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