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देहरादून: आम पर गरजे बुलडोजर, खास पर सरकार चुप

सुनीत द्विवेदी, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 12 Jul 2018 11:03 AM IST
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दून शहर से चार सप्ताह में अतिक्रमण हटाने के हाईकोर्ट के आदेश पर जितनी तत्परता से कार्रवाई शुरू की गई, उसके विपरीत साडा (स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथारिटी) क्षेत्र में अतिक्रमण की जांच के लिए एसआईटी गठन और एक्शन पर सरकार क्यों खामोश है? बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने अतिक्रमण टास्क फोर्स के अध्यक्ष एमडीडीए वीसी आशीष श्रीवास्तव से मिलकर यह सवाल उठाया। साडा क्षेत्र में अतिक्रमण के मामले में हाईकोर्ट के आदेश की प्रति सामने रखते हुए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने सवाल उठाया कि आम लोगों पर बुलडोजर गरज रहे हैं, फिर साड़ा क्षेत्र में अवैध कब्जा जमाए खास लोगों पर क्यों मेहरबानी?
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यह प्रतिनिधिमंडल सर्वे चौक स्थित महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के आईआरडीटी सभागार में बुधवार की शाम एमडीडीए उपाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव से मिला। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों नेहरू कॉलोनी निवासी बीडी नौटियाल, एनसी गैरोला, केएसए रावत आदि ने हाईकोर्ट के दोनों फैसलों से उन्हें अवगत कराते हुए दोनों के तहत कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल का आरोप था कि सरकार हाईकोर्ट के एक जैसे फैसलों पर एक पर बेरहमी और दूसरे पर मेहरबानी का रुख दिखा रही है। 

दरअसल, अतिक्रमण के मामले में हाईकोर्ट ने एक दिन के अंतर पर दो फैसले दिए थे। 18 जून को दिए फैसले में कोर्ट ने आदेश दिए थे कि दून शहर से चार सप्ताह में अतिक्रमण हटाया जाए। इसके ठीक अगले दिन न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की पीठ ने 19 जून को अनुज कंसल की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव को निर्देशित किया था कि साडा क्षेत्र के तहत हरबर्टपुर, विकासनगर और दून टाउन से लगे इलाकों में हुए अनाधिकृत निर्माण और अतिक्रमण की जांच के लिए कम से कम एसएसपी और आईजी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया जाए। यह एसआईटी साडा क्षेत्र के उन अधिकारियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करेगी, जिनके  कार्यकाल में बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटान और अनाधिकृत निर्माण हुआ है।

कोर्ट ने यह भी हिदायत दी कि मामले में छोटे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर औपचारिकता न निभाई जाए। कोर्ट ने आदेश किया था कि एसआईटी मामले की गंभीरता से जांच कर उन अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित करेगी, जो अपना संवैधानिक दायित्व निभाने में विफल रहे। इस कार्रवाई को करने के लिए एसआईटी को तीन महीने का समय दिया गया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देशित किया कि कृषि भूमि का लैंड यूज ग्रुप हाउसिंग के लिए किसी भी कीमत पर न बदला जाए। इसमें अपनी जमीन पर घर बनाने वाले लोगों को राहत देने की भी बात कही गई है। इसके अलावा साडा क्षेत्र में अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ आदेश के दिन (19 नवंबर) से आठ हफ्तों में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इस संबंध में अपर सचिव भोपाल सिंह मनराल से मामले में प्रगति जानने का प्रयास किया गया, मगर वे उपलब्ध नहीं हुए। 

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके तहत मैंने अपर सचिव भोपाल सिंह मनराल को नियुक्त कर दिया है, जो मामले में कार्रवाई कर रहे हैं। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं बता सकता।
- ओमप्रकाश, अपर मुख्य सचिव 

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