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12 साल पुरानी 'चिंगारी' ने ली प्रोफेसर की जान

केकेशर्मा/अमर उजाला, रुड़की Updated Sat, 26 Oct 2013 06:45 PM IST
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रुड़की में अगस्त में हुए प्रोफेसर हत्याकांड से पर्दा उठ गया है। प्रोफसर की संदिग्ध अवस्था में मौत के बाद हत्या की संभावना जताई जा रही थी।
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इसका खुलासा शनिवार को हत्यारोपी के कबूलनामे के बाद हो गया। प्रोफसर की हत्या करने वाला उनका कई साल पहले रह चुका ड्राइवर ही था।
प्रोफेसर की पत्नी को मां की तरह मानने वाले हिदायत अली को उसका उत्पीड़न रास नहीं आया था। कई साल पहले ही उसके मन में प्रोफेसर के प्रति नफरत की जो चिंगारी पैदा हुई वह 12 साल बाद लावा बनकर बाहर निकली।
परिवार का करीबी
आरोपी हिदायत अली ने 23 साल की उम्र में आईआईटी में ऑन डिमांड कार चलाने का काम शुरू किया था। वह आईआईटी के प्रोफेसर अरुण कुमार के अलावा अन्य प्रोफेसर की गाड़ी चला चुका है। बकौल कोतवाली प्रभारी वह प्रोफेसर अरुण कुमार के परिवार का बहुत करीबी रहा है। प्रोफेसर की पूर्व पत्नी को वह मां की तरह मानता था, लेकिन प्रोफेसर का अपनी पत्नी का उत्पीड़न करना उसे कतई रास नहीं आ रहा था।

आपत्तिजनक टिप्पणी करता रहा
यहीं से प्रोफेसर का चरित्र उसकी नजरों में खलनायक की तरह खटकने लगा था। इंस्पेक्टर पुंडीर ने बताया कि प्रोफेसर का नजरिया चालक को रास नहीं आ रहा था। वह लड़कियों और महिलाओं को लेकर चालक के सामने आपत्तिजनक टिप्पणी करता रहा है, जिसे लेकर उसके मन में प्रोफेसर के प्रति घृणा की चिंगारी पैदा हो गई। यह चिंगारी बढ़ते-बढ़ते कब लावा बन गई। इसका न तो प्रोफेसर को आभास हुआ और न ही हिदायत अली को।

27 अगस्त की रात को वह प्रोफेसर से मिलने आया था, लेकिन उसकी आपत्तिजनक टिप्पणी सुनकर हिदायत अली के गुस्से का ज्वालामुखी की तरह विस्फोट हुआ और उसने प्रोफेसर की गला रेत कर हत्या कर दी। सबसे बड़ी बात यह रही कि हत्यारोपी ने अपना गुनाह तो कबूल किया ही साथ ही  किसी अन्य को इस मामले में झूठा नहीं फंसाया। उसने पुलिस के सामने अपनी भावनाओं के हाथों किए गए इस गुनाह को कबूल कर लिया।

हत्या और आत्महत्या में उलझा रहा था मामला

प्रोफेसर की मौत के बाद पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही थी, लेकिन प्रोफेसर के परिजनों के दबाव के चलते पुलिस को यह मामला हत्या में दर्ज करना पड़ा था। घटनास्थल पर कई ऐसे सुराग मिले थे जिसके चलते पुलिस को मजबूरन यह मामला हत्या में दर्ज करना पड़ा था।

मुंह पर तकिया रख रेती थी गर्दन

कोतवाली इंस्पेक्टर ने बताया कि हत्यारोपी ने गला रेतने से पहले प्रोफेसर के मुंह पर तकिया रख दिया था। जिससे उसके चिल्लाने की आवाज बाहर न निकले। यही नहीं जाते-जाते उसने लाइटर से उसके कपड़ों में आग लगा दी थी। जिससे उसकी पीठ का पिछला हिस्सा भी जल गया था।
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