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Child Sex Ratio: उत्तराखंड में बाल लिंगानुपात में हुआ सुधार, एक हजार पर 984 बालिकाएं ले रहीं जन्म

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 29 Sep 2022 06:43 PM IST
सार

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रावत ने कहा कि बाल लिंगानुपात में सुधार सरकार की बड़ी उपलब्धि है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही है।

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नवजात - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में बाल लिंगानुपात में सुधार हुआ है। पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2020-21 की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में प्रति एक हजार जन्म पर 984 बालिकाएं हैं। वहीं प्रदेश के अल्मोड़ा, चमोली, नैनीताल, पौड़ी व उधमसिंह नगर में अधिक बालिकाओं का जन्म हुआ है। प्रदेश में संस्थागत प्रसव दर भी 90 प्रतिशत पहुंच गई है।



स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रावत ने कहा कि बाल लिंगानुपात में सुधार सरकार की बड़ी उपलब्धि है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही है। केंद्र व राज्य सरकार की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ भी प्रदेश के आम लोगों को मिल रहा है।


लिंगानुपात के आंकड़ों में सुधार के लिए सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के साथ ही भ्रूण जांच पर रोक लगाई। वर्तमान में राज्य में 90 प्रतिशत संस्थागत प्रसव किए जा रहे हैं। इसे शत प्रतिशत करने का प्रयास किया जा रहा है।  

जिलेवार लिंगानुपात पर एक नजर

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 0-5 आयु वर्ग तक के बच्चों का लिंगानुपात 984 दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में प्रति 1000 बालकों पर 984 बालिकाएं जन्म ले रही हैं। अल्मोड़ा, चमोली, नैनीताल, पौड़ी व उधमसिंह नगर में बालकों की तुलना में अधिक बालिकाओं का जन्म हुआ है।


जनपद अल्मोड़ा में 1000 बालकों के मुकाबले 1444 बालिकाओं ने जन्म लिया, जबकि चमोली में 1026, नैनीताल में 1136, पौड़ी में 1065 व उधमसिंह नगर में 1022 बेटियों ने जन्म लिया। इसके अलावा बागेश्वर में 1000 बालकों के सापेक्ष 940, चंपावत में 926, देहरादून में 823, हरिद्वार में 985, पिथौरागढ़ में 911, रुद्रप्रयाग में 958, टिहरी में 866 व उत्तरकाशी में 869 बालिकाओं ने जन्म लिया, जो कि राष्ट्रीय औसत 929 के मुकाबले कहीं अधिक है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से राज्य में संस्थागत प्रसव को लेकर भी गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है।

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