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उत्तराखंड बजट सत्र 2021ः लॉकडाउन का जख्म बरकरार, बजट से है मरहम की दरकार

अंकित कुमार गर्ग, अमर उजाला, रुड़की Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 04 Mar 2021 10:00 AM IST
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प्रदेश के बजट से मरहम की दरकार
प्रदेश के बजट से मरहम की दरकार - फोटो : pixabay

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सैकड़ों लघु उद्योगों पर लॉकडाउन का जख्म अभी तक बरकरार है। करीब-करीब बंदी की कगार पर पहुंच चुके इन उद्योगों और इनमें काम करने वालों को प्रदेश के बजट से मरहम की दरकार है। चार ऐसे प्रमुख क्षेत्र हैं, जिनमें लॉकडाउन के चलते 90 फीसदी तक कारोबार घट गया है।
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उद्यमियों का कहना है कि जहां एक ओर माल की डिमांड नहीं बढ़ रही है तो वहीं कच्चे माल महंगे होने के कारण उद्योगों की कमर टूट गई है। उद्योगों में जान फूंकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के स्तर से कदम उठाए जाने चाहिए।

रुड़की में 300 से अधिक लघु उद्योग है। इनमें बनने वाला माल न केवल भारत के विभिन्न प्रदेशों में सप्लाई होता है बल्कि विदेशों में भी भारी डिमांड रहती है। लॉकडाउन के दौरान विदेशों में निर्यात पर लगी रोक से अभी तक यहां के उद्योग उबर नहीं पाए हैं। उद्यमियों का कहना है कि यहां चार क्षेत्रों से जुड़े करीब 200 उद्योग बंदी की कगार पर हैं।

इन उद्योगों का 90 फीसदी तक कारोबार घट गया है जबकि अन्य उद्योगों के कारोबार में भी 30 फीसदी तक गिरावट आई है। सबसे ज्यादा असर इंजीनियरिंग और डिग्री कॉलेजों के लिए उपकरण बनाने वाले उद्योगों पर पड़ा है। लॉकडाउन के बाद से कॉलेजों में अभी तक उपकरणों की मांग शुरू नहीं हो पाई है। इसके चलते मेकैनिकल, इलेक्ट्रानिक्स और लैब के उपकरण बनाने वाली करीब सौ यूनिटों में उत्पाद बुरी तरह प्रभावित हो गया है।

इसी तरह गिफ्ट आइटम से जुड़ी से करीब 60 यूनिट में भी डिमांड कम होने से उत्पादन प्रभावित है। उद्यमियों ने बताया कि गिफ्ट आइटम का ज्यादा कारोबार 25 दिसंबर तक होता है। अब अप्रैल के बाद ही कुछ सुधार की उम्मीद है। इसी तरह प्रोडक्शन का काम बंद रहने से यहां डिफेंस उपकरणों की डिमांड 35 फीसदी तक घट गई है।

डिफेंस के लिए पैकिंग बॉक्स, ऑप्टिक्स (लेंस), प्लास्टिक एवं रबर के उत्पाद, टेस्टिंग इंस्ट्रूमेंट आदि बनाने वाली करीब 20 यूनिट भी डिमांड में कमी के चलते मंदी की जद में हैं। इसी तरह अन्य लघु उद्योगों पर भी लॉकडाउन का बुरा असर पड़ा है। रुड़की स्माल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि प्रकाश, उद्यमी मुकुल गर्ग, मोहम्मद मुस्तकीम, विजय भारद्वाज का कहना है कि लघु उद्योगों को उबारने के लिए प्रदेश सरकार को बजट में प्रावधान करने चाहिए।

कच्चे माल के रेट में 30 फीसदी इजाफा 

उद्यमियों ने बताया कि ब्रास, स्टील, कॉपर, एल्यूमीनियम एवं एमएस के रेट में करीब तीस फीसदी तक की वृद्धि हो गई है। इससे पुराने ऑर्डर को पूरा करने में दिक्कत आ रही है। ऑर्डर पूरा नहीं किया तो बैंक गारंटी खत्म होने जैसी समस्याएं होंगी। उद्यमियों का कहना है कि सरकार का मूल्यों पर नियंत्रण नहीं है, जिससे समस्याएं बढ़ रही हैं।

ये है बजट से दरकार 

उद्यमियों की मांग है कि लघु उद्योगों में छाई मंदी दूर करने के लिए बिजली की दरें कम की जानी चाहिए। इसके अलावा बढ़ते डीजल के दामों पर रोक के लिए सब्सिडी दी जानी चाहिए। वहीं, सर्वे ड्राइंग एवं टेस्टिंग इंस्ट्रूमेंट पर वर्तमान में 18 फीसदी जीएसटी लग रहा है। इसे पांच या 12 फीसदी के स्लैब पर लाना चाहिए। रिपेयरिंग टेस्टिंग इक्यूपमेंट की यूनिट को राहत देने के लिए जीएसटी का स्लैब पांच प्रतिशत किया जाता है तो इससे छोटे स्तर पर काम कर रहे उद्यमियों और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

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