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भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल के जाति प्रमाणपत्रों की जांच पूरी, मामले में सुनवाई जारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Updated Thu, 12 Sep 2019 08:49 AM IST
Bjp mla deshraj karnwal caste certificate investigation complete High continue case
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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हाईकोर्ट ने भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल के जाति प्रमाणपत्रों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई जारी रखी है। पूर्व में कोर्ट ने उनके जाति  प्रमाणपत्रों की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा था। सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि उनके जाति से संबंधित प्रमाणपत्रों की जांच पूरी हो चुकी है। 
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी विपिन तोमर ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि देशराज कर्णवाल उत्तराखंड के मूल निवासी नहीं हैं। वह यूपी के सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं। याचिकाकर्ता ने कर्णवाल को वर्ष 2005 में जारी जाति प्रमाणपत्र को निरस्त करने की मांग की थी। 

वहीं, इन आरोपों के जवाब में देशराज कर्णवाल के अधिवक्ता ने स्क्रूटनी कमेटी को अवगत कराया कि कर्णवाल वर्ष 1984 से ही अपनी माता और भाई के साथ वर्तमान हरिद्वार जिले में निवास करने लगे थे। तब से वह लगातार हरिद्वार जिले में रह रहे हैं और कई वर्षों से सामाजिक व राजनीतिक रूप से हरिद्वार जिले में ही सक्रिय हैं।

कर्णवाल के अधिवक्ता ने वर्ष 1984 में देशराज कर्णवाल की माता जी की ओर से बनाया गया किरायानामा प्रस्तुत किया। इसके अलावा, वर्ष 1997 में जिला सेवायोजन कार्यालय हरिद्वार में कराए गए पंजीकरण के साक्ष्य भी कोर्ट में पेश किए, जिसमें स्पष्ट रूप से देशराज कर्णवाल का नाम अनुसूचित जाति के अभ्यर्थी के रूप में दर्ज है।

कर्णवाल के अधिवक्ता ने कमेटी को बताया कि इस प्रकरण पर राज्य निर्वाचन आयोग पहले भी निर्णय ले चुका है। राज्य निर्वाचन आयोग ने देशराज के जाति प्रमाणपत्र के संबंध में की गई शिकायतों को निराधार पाया था। कर्णवाल के अधिवक्ता का कहना था कि  इन तथ्यों के साथ-साथ अन्य कई तथ्य कमेटी के सामने रखे गए जिनसे यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि यह शिकायतें पूरी तरह निराधार हैं। 

बता दें कि 7 सितंबर 2019 को दोनों पक्षों को विस्तारपूर्वक सुनने के बाद स्क्रूटनी कमेटी ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। 9 सितंबर 2019 को शासन स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी ने अपना निर्णय घोषित किया, जिसमें कमेटी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि देशराज कर्णवाल को वर्ष 2005 में जारी किया गया जाति प्रमाणपत्र पूरी तरह वैध है तथा उनके द्वारा इस जाति प्रमाणपत्र को प्राप्त करने में किसी तरह का कोई आपराधिक कृत्य नहीं किया गया है।
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