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डीएवी का कबूलनामा, बाकी स्कूलों का इनकार

Dehradun Bureau Updated Tue, 06 Jun 2017 09:51 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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हरिद्वार।
शिक्षा विभाग के नोटिस का जवाब देते हुए डीएवी के अलावा किसी भी स्कूल ने स्वीकार नहीं किया है कि उन्होंने अभिभावकों से रि-एडमिशन फीस या कॉशन मनी ली है। डीएवी पब्लिक स्कूल ने कॉशन मनी लेने की बात कुबूल करते हुए कहा है कि इसे लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग अब बाकी स्कूलों के दावों की पड़ताल करने में जुट गया है।

अभिभावकों को निजी स्कूलों की मनमानी से निजात दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों शासनादेश जारी कर रि-एडमिशन फीस और कॉशन मनी लौटाने के आदेश सभी प्राइवेट स्कूलों को दिए थे। विभाग ने शासनादेश का पालन कराने के लिए जिले भर के एक हजार से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों को नोटिस जारी किए थे। जिलाधिकारी ने भी स्कूलों में जाकर पड़ताल के निर्देश शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दिए थे। हरिद्वार शहरी क्षेत्र के स्कूलों को भी नोटिस जारी कर रि-एडमिशन फीस और कॉशन मनी को लेकर जवाब मांगा गया था।

शहर के प्रमुख और अधिकांश स्कूलों ने विभाग को अपने लिखित जवाब दिए हैं। ताअज्जुब की बात यह है कि डीएवी पब्लिक स्कूल जगजीतपुर के अलावा कोई भी स्कूल यह बात मानने को तैयार नहीं है कि उन्होंने अभिभावकों से रि-एडमिशन फीस या कॉशन मनी ली है। डीएवी ने अवगत कराया है कि उन्होंने अभिभावकों से दो हजार रुपये कॉशन मनी ली है। अभी तक यह धनराशि अभिभावकों को बच्चे की पढ़ाई पूरी होने के बाद लौटाई जाती थी।

शासनादेश जारी होने के बाद अभिभावकों को यह धनराशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। डीएवी के अलावा डीपीएस, शिवडेल, स्वामी हरिहरानंद, गुरु राम राय, महर्षि विद्या मंदिर, सेंट मैरी, दून कैंब्रिज स्कूल, डिवाइन लाइट, एसएम पब्लिक स्कूल सहित बाकी सभी कान्वेंट स्कूलों ने दावा किया है कि उन्होंने अभिभावकों से ऐसे किसी भी मद में कोई धनराशि नहीं ली है। स्कूल के दावे कितने सच हैं, विभाग अब इसकी जांच पड़ताल में जुट गया है।


कई स्कूलों में बदली थी फीस की रसीदें
अधिकांश स्कूल यूं ही रि-एडमिशन फीस या कॉशन मनी लेने की बात से इनकार नहीं कर रहे हैं। इनमें कई स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने अभिभावकों से रि-एडमिशन फीस भी वसूली और कॉशन मनी भी जमा कराई। अलबत्ता शासनादेश होने और विभाग व प्रशासन का शिकंजा कसता देख बचने के लिए स्कूलों ने अभिभावकों से पुरानी रसीद लेते हुए नई रसीद थमा दी। इस रसीद में फीस को एनुअल चार्ज का नाम दे दिया गया। यह अलग बात है कि इन स्कूलों के अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए विभाग के सामने सच बोलने की हिम्मत न जुटा पाएं। ऐसे कई स्कूलों ने एनुअल चार्ज लेने की बात स्वीकार करते हुए बताया है कि इसकी एवज में वे अभिभावकों को पैरेंटस मीटिंग, मैसेज भेजने आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।


शासनादेश के अनुपालन में सभी प्राइवेट स्कूलों को नोटिस जारी कर रि-एडमिशन और कॉशन मनी के संबंध में जानकारी मांगी गई थी। सिर्फ डीएवी पब्लिक स्कूल ने कॉशन मनी लेने की बात स्वीकार करते हुए अवगत कराया है कि धनराशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बाकी सभी स्कूलों ने रि-एडमिशन या कॉशन मनी लेने की बात से इनकार किया है। सभी स्कूलों के दावों की जांच पड़ताल की जा रही है। यदि किसी स्कूल ने गलत तथ्य उपलब्ध कराए हैं तो उसके खिलाफ निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
-अजय चौधरी, खंड शिक्षा अधिकारी बहादराबाद

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