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बिजली चोरों पर शासन की मेहरबानी

Dehradun Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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देहरादून। आम आदमी तो नहीं लेकिन बिजली चोरी करने वाले उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश जरूर पुकार सकते हैं। कारण यह है कि बिजली संकट से जूझते इस प्रदेश में बिजली चोरी रोकने को शासन गंभीर नहीं है, जिसका फायदा मुफ्त की बिजली प्रयोग करने वाले उठाते हैं। केंद्र सरकार की ओर से करोड़ों की सहायता मिलने के बावजूद शासन बिजली चोरी रोकने को लेकर संजीदा नहीं है। प्रदेश में लगभग 20 फीसदी से अधिक बिजली चोरी हो जाती है। इस पर अंकुश लगाने से बिजली संकट से काफी हद तक राहत मिल सकती है। इसी लापरवाही ने पर केंद्रीय ऊर्जा सचिव पी उमाशंकर ने प्रदेश शासन से जवाब तलब किया है।
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यह थी योजना
प्रदेश के 31 शहरों में सितंबर 2012 तक बिजली चोरी रुक जानी चाहिए थी, लेकिन केंद्र की ओर से सहायता ऐसा नहीं हो पाया। इसको लेकर इन शहरों में एनर्जी आडिट सिस्टम विकसित किया जाना था, जिसके तहत खंभों, ट्रांसफार्मर और फीडर में आटोमेटिक मीटर लगने थे। त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (एपीडीआरपी) पार्ट ए के तहत आडिट एनर्जी सिस्टम विकसित करने के लिए उत्तराखंड को कुल 163.42 करोड़ रुपये खर्च करने थे। इसमें 125.82 करोड़ रुपये केंद्र ने दिए थे।


एनर्जी सिस्टम लागू करने के मामले में उत्तराखंड का स्थान छठा है। निश्चित तौर पर कुछ कार्य अधूरे पड़े हैं। इसे अगले छह माह में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। - एके जौहरी, प्रबंध निदेशक ऊर्जा निगम

16 शहरों लागू होगा पार्ट बी
उत्तराखंड के 16 शहरों में एपीडीआरपी पार्ट बी लागू करने की तैयारी है। यह योजना 260 करोड़ रुपये की है। इसमें लंढौर, मसूरी, रामनगर, हल्द्वानी, रुद्रपुर, रुड़की, हरिद्वार सहित अन्य शहर शामिल हैं। इन शहरों में नई विद्युत लाइनें, इलेक्ट्रानिक मीटर, नए ट्रांसफार्मर, नए बिजली घरों को लेकर काम होना है। संभव है कि अगले सप्ताह तक इसको लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच एग्रीमेंट हो जाए। इस योजना को क्रियान्वित करने को लेकर शनिवार को निगम के प्रबंधन निदेशक एके जौहरी ने अधिकारियों के साथ बैठक की।

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