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हम हिंदुस्तानी, अफजल गुरु को फांसी अच्छी

Dehradun Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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देहरादून। हिंदुस्तान का बाशिंदा होने के नाते तो यही कहेंगे कि अफजल गुरु को फांसी एक अच्छा कदम है। लेकिन सरकारी मुलाजिम और कश्मीरी होने की वजह से इस मसले पर कोई भी टिप्पणी गैर-जरूरी होगी। अफजल गुरु की फांसी पर यह प्रतिक्रिया थी क्षेत्रीय प्रचार निदेशालय जम्मू-कश्मीर की ओर से दून पहुंचे कश्मीरी दल की।
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दल के एक अहम सदस्य और बड़गाम जिले से ताल्लुक रखने वाले मुश्ताक अहमद की मानें तो व्यक्ति चाहे कोई हो, जो भी हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए। यह दल शनिवार सुबह इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) के भ्रमण के बाद दोपहर तकरीबन एक बजे फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई) का नजारा करने पहुंचा था। यह दल की पहली उत्तराखंड विजिट है। वह राज्य में चल रही केंद्र की विभिन्न योजनाओं का जायजा लेने यहां आए हैं।

फांसी के बाद कश्मीर घाटी में संचार सेवाओं को बंद कर दिया गया है, इस संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब दिया दल का नेतृत्व कर रहे गुलशन रैना ने। उनके बकौल यह कदम इस रोशनी में सही ठहराया जा सकता है, कि सरकार का काम अमन बनाए रखना है। अफजल बारामूला, सोपोर क्षेत्र से ताल्लुक रखता था। हो सकता है कि अफजल गुरु को फांसी के बाद वहां हालात बिगड़ जाते। या ऐसा करने की कोशिश की जाती। इस कदम से कम-से-कम हालात को काबू रखने में मदद मिलेगी।

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