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बेमियादी हड़ताल पर मिनिस्टीरियल कर्मी

Dehradun Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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देहरादून। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ग्रेड वेतन स्वीकृत किए जाने सहित तीन सूत्रीय लंबित मांगों पर अमल न होने पर गुस्साए मिनिस्टीरियल कर्मचारी बृहस्पतिवार से बेमियादी हड़ताल पर चले गए, जिससे राजधानी में विभिन्न विभागों के कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। कर्मचारियों ने कहा कि मांगों पर अमल न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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मांगों को लेकर हड़ताल पर गए मिनिस्टीरियल कर्मचारियों ने शासन पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए परेड ग्राउंड में धरना दिया। सभा में प्रदेश अध्यक्ष टीएस पुंडीर एवं महामंत्री सुनील कोठारी ने कहा कि मांगो पर सरकार की ओर से टाल मटोल की नीति अपनाई जा रही है। शासन ने समझौता वार्ता में शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद 26 दिसंबर को हुई वेतन विसंगति समिति की बैठक में ग्रेड वेतन बढ़ाने संबंधी मांग पर दुबारा से परीक्षण कराए जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षण ही कराना था तो मामले को पिछले एक साल से क्यों लटकाया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि शुक्रवार से हड़ताली कर्मचारी टीमें गठित कर विभिन्न कार्यालयों का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के दौरान यदि कोई मिनिस्टीरियल कर्मचारी काम करता पाया गया तो उस पर पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। धरना देने वालों में केएन भट्ट, पूर्णानंद नौटियाल, आरपी जुयाल, जेपी सकलानी, बहादुर सिंह बिष्ट, सुभाष देवलियाल, परमानंद चमोली, आशीष वर्मा, मुकेश नवानी, यशपाल सिंह आदि शामिल थे।

यहां हुआ काम प्रभावित
कर्मचारियों की हड़ताल के चलते कलेक्ट्रेट, आरटीओ, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, जिला विकास अधिकारी कार्यालय सहित विभिन्न दफ्तरों में काम काज प्रभावित हुआ। दोपहर दो बजे जिला विकास अधिकारी दफ्तर में सन्नाटा पसरा था। हालांकि जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय में कर्मचारी काम करते नजर आए।

समर्थन दिया
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मिनिस्टीरियल कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन किया है। परिषद की कोर कमेटी की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर प्रहलाद सिंह ने कहा कि पिछले काफी समय से मांग के बावजूद मिनिस्टीरियल कर्मियों की न्यायोचित मांगों की अनदेखी हो रही है। बैठक में प्रदेश प्रवक्ता अरुण पांडे, प्रदीप कोहली, बाबू खान, ओमवीर सिंह, भगत सिंह चौहान आदि मौजूद थे।

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