रक्षा भूमि संरक्षण को सेटेलाइट मैपिंग का इंतजार

Dehradun Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
देहरादून। छावनियों में सैन्य भूमि पर अवैध कब्जे रोकने को अब सेटेलाइट मैपिंग का इंतजार छावनियां कर रही हैं। उत्तराखंड की चार छावनियों सहित पश्चिम उत्तर प्रदेश की एक छावनी की आईआईटी रुड़की ने सेटेलाइट मैपिंग कर सीमा निर्धारण का नया खाका तैयार कर लिया है। रक्षा भूमि की जीपीएस आधारित मैपिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब जल्द ही उसके मुताबिक सभी छावनियां अपनी सीमाएं निर्धारित कर अवैध कब्जों को हटा सकेंगी।
ब्रिटिश समय में सिविल आबादी से दूरी पर स्थापित सैन्य छावनियां के साथ अब शहर बस गए हैं। ऐसे में छावनियों की खाली पड़ी भूमि पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। राजस्व रिकार्ड के आधार पर जीपीएस मैपिंग से अतिक्रमण की असल तस्वीर सामने आएगी। रक्षा संपदा महानिदेशालय ने इस वर्ष शुरूआत में क्लेमेंटटाउन, गढ़ी कैंट, रुड़की कैंट, चकराता और मेरठ की जीपीएस मैपिंग का जिम्मा आईआईटी रुड़की को सौंपा था। क्लेमेंटटाउन कैंट के सीईओ अरविंद द्विवेदी ने कहा कि बरसों पुराने छावनियों के सीमा स्तंभों का जीपीएस मैपिंग से दोबारा चिह्निकरण किया जाएगा। आईआईटी की मैपिंग जल्द छावनियों को मिल जाएगी जिसके बाद छावनियों के साथ लगते सिविल क्षेत्रों में कोई भी सीमा त्रुटि ठीक की जा सकेगी।

सेना को भी मिलेगी मदद
सेटेलाइट मैपिंग का सर्वाधिक फायदा सेना को मिलेगा। देहरादून में लगभग 10 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण है। सेना को कई क्षेत्रों में अतिक्रमण को लेकर आशंका है, जिसमें बिंदाल नदी के साथ लगते क्षेत्रों के अलावा क्लेमेंटटाउन में ग्रामीण क्षेत्रों के साथ लगती भूमि है। आईआईटी ने इन क्षेत्रों में भी जीपीएस मैपिंग की है।

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