रेप के आरोपी को सजा दिलवाना भी सजा से कम नहीं

Dehradun Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
देहरादून। रेप के मामलों में आरोपी को सजा दिलवा पाना भी किसी सजा से कम नहीं। इन मामलों में अदालतों के कड़े रुख के बावजूद ज्यादातर आरोपी छूट जाते हैं। इसे दून के आंकड़ों से समझा जा सकता है। देहरादून की अदालतों 2012 में बलात्कार के 16 आरोपियों पर चल रहे मुकदमों के फैसले आए। जानकर हैरानी होगी कि इनमें से सिर्फ दो को ही सजा हो पाई। शेष14 बाइज्जत रिहा हो गए। वजह पुलिस का रवैया, कोर्ट-कचहरी की प्रक्रियात्मक जटिलता और कमजोर पैरवी रही।
खुलकर आवाज नहीं उठा पाती पीड़िता
जानकारों की मानें तो दुराचार के अधिकांश मामले में पीड़ित पक्ष खुलकर आवाज नहीं उठा पाता है। वहीं कई बार गवाह भी दबाव में आकर पक्षद्रोही हो जाते हैं। यही कारण है कि आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी करना पड़ता है। बहुधा रेप की शिकार लड़की बचाव पक्ष के वकीलों की ‘तेज-तर्रार जिरह’ और ‘अवांछित सवालों’ से निजात पाने के लिए भी पैरवी बीच में छोड़ देती है। कप्तान केवल खुराना भी तर्कसंगत बात कहते हैं कि कई मामलों में आरोपी रिश्तेदार अथवा परिचित होते हैं। ऐसे में रिपोर्ट लिखाने के बाद भी पीड़ित पक्ष मुकर जाते हैं। कई बार ऐसे भी होता है कि ‘मित्र पुलिस’ भी पीड़ित पक्ष को कोर्ट-कचहरी के झमेले और सामाजिक सम्मान और अपमान के बारे में ‘समझा’ देती है जिससे या तो मुकदमा वापस हो जाता है अथवा उसकी पैरवी कमजोर हो जाती है।


यह है सजा का आंकड़ा
वर्ष सजा रिहा
2012 02 14
2011 12 11
2010 05 19


दून में हुई रेप की घटनाएं
----------------------
साल घटनाएं
2012 26
2011 24
2010 28

कोट
दुराचार के मामले में दोषियों के बरी होने के पीछे कमजोर पैरवी बड़ी वजह है। कुछ मामलों में तो गवाह ही पक्षद्रोही हो जाते हैं। इसके अलावा पीड़ित पक्ष की सुरक्षा क ो लेकर पुलिस भी संजीदा नहीं रहती है। आरोपी पक्ष के दबाव में पीड़ित पक्ष सुलह करने के लिए मजबूर हो जाता है।
पृथ्वी सिंह नेगी, वरिष्ठ अधिवक्ता

पैरोकारों से मांगी है रिपोर्ट
अदालतों में विचाराधीन रेप अथवा दूसरे संगीन अपराधों में पैरोकारी की हर माह समीक्षा की जाती है। पीड़ित को सुरक्षा में कोताही नहीं की जाती है। लेकिन कई मामले ऐसे होते हैं, जिनमें आरोपी रिश्तेदार और परिचित होते हैं। ऐसे में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद भी पीड़ित मुकर जाते हैं। महिलाओं से संबंधित अपराधों की कोर्ट में की जा रही पैरवी की थानाें के पैरोकारों से रिपोर्ट तलब की गई है।
केवल खुराना, एसएसपी

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