तेज ठंड में फर्श पर बैठकर ठिठुर रहे नौनिहाल

Dehradun Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
देहरादून। सरकार को आए न आए, लेकिन हर जागरूक शख्स यह खबर पढ़कर शर्मसार जरूर होगा। इस ठिठुरन भरी सर्दी में सरकारी स्कूलों में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ रहे हैं। हैरत की बात यह है कि इन स्कूलों पर सालाना करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन फर्नीचर के लिए बजट की व्यवस्था ही नहीं है। कहने को तो सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू है, लेकिन बैठने को आज भी टाट पट्टी या बोरी का इस्तेमाल हो रहा है। शिक्षा विभाग का नारा है शिक्षार्थ आइए, सेवार्थ जाइए...लेकिन सवाल यह है कि बच्चों की कंपकंपी बंद हो तो वे पढ़ाइ करें। जिस बच्चे का बचपन असुविधाओं में बीतेगा, क्या सह वाकई सेवा की भावना लेकर स्कूल से निकलेगा।

आंखों देखी-1 : राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बंजारावाला
कक्षा नवीं के बच्चे क्लास में नीचे बैठकर पढ़ रहे हैं। ठंड से बचने को किसी ने अपने दोनों हाथ स्वेटर के अंदर डाल रखे हैं तो कोई गुड़मुड़ी हुआ बैठा है। वहीं, 10वीं क्लास के बच्चे धूप में बैठे हैं। स्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य ओम प्रकाश गैरोला बताते हैं कि स्कूल में 86 बच्चे हैं। यह विद्यालय 2006 में उच्चीकृत होकर हाईस्कूल बना, लेकिन बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर नहीं है। ठंड से बचाने के लिए बच्चों को धूप में बैठाया जाता है।

आंखों देखी-2 : प्राथमिक विद्यालय बंजारावाला
कुछ कक्षाएं कमरों में तो कुछ धूप में चल रही हैं। कुछ बच्चे टाट पट्टियों पर तो कुछ बोरियों पर बैठे नजर आए। स्कूल की प्रधानाध्यापिका उमा काला बताती हैं कि बच्चों की संख्या के अनुसार टाट पट्टियां उपलब्ध नहीं हैं। बच्चों को ठंड से बचाने के लिए बोरियों पर बैठाया जाता है। लेकिन, यह बोरियां भी मुफ्त नहीं हैं। मिड डे मील की बोरियों को नीलाम करने के बजाए शिक्षिकाएं अपनी जेब से इनका पैसा जमा कर देती हैं।


आंखों देखी-3 : राजकीय प्राथमिक विद्यालय बांध विस्थापित बंजारावाला
यहां भी बच्चे टाट पट्टियों पर बैठे ठिठुर रहे थे। इस स्कूल के भवन की स्थिति खराब हो चुकी है। नए भवन के लिए बजट मंजूर हो चुका है, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया है। स्कूल की सहायक अध्यापिका अंजू मनादुली बताती हैं कि ठंड में नीचे बैठकर बच्चे बीमार हो रहे हैं। फर्नीचर की व्यवस्था के लिए काफी कोशिश की गई, लेकिन कहीं मदद नहीं मिल पाई। सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी के कारण छात्र संख्या लगातार कम होती जा रही है।

इनकी सुनिए
ठंड में नीचे बैठने से निश्चित रूप से बच्चों को परेशानी होती है। कुछ स्कूलों ने हालांकि स्कूल को भेजी जाने वाली रखरखाव मद से हर साल फर्नीचर बनवाकर बच्चों के बैठने की व्यवस्था की है, लेकिन परेशानी बनी हुई है। विभाग के पास बच्चों के फर्नीचर के लिए अलग से कोई मद नहीं है।-पदमेंद्र सकलानी, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक

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