हड़ताल से हाहाकार, आज से राहत

Dehradun Updated Fri, 21 Dec 2012 05:32 AM IST
रुड़की। बृहस्पतिवार का दिन खासा परेशानी भरा रहा। हड़ताल के चलते सरकारी दफ्तरों में काम नहीं होने से लोग सुबह से शाम तक भटकते रहे। लेकिन कहीं उनकी फरियाद नहीं सुनी गई। बैंक संबंधी कार्य भी नहीं निपट सके और न ही सरकारी अस्पतालों में इलाज नसीब नहीं हो सका। बैंक-मिनिस्ट्रीयल कर्मी और लैब टेक्नीशियन जहां मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे, वहीं रजिस्ट्रार कार्यालय, खाद्य आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों और फार्मेसिस्टों ने पदोन्नति में आरक्षण के विरोध में कार्य बहिष्कार किया। लेकिन राहत की बात यह है कि देर शाम को कर्मचारी संगठनों ने कार्य बहिष्कार वापस लेने की घोषणा कर दी। आज से सरकारी दफ्तरों में कामकाज सुचारु होने की उम्मीद है।

ठप रहीं स्वास्थ्य सेवाएं, इलाज को तरसे
सिविल अस्पताल में चिकित्सकों, फार्मेसिस्ट और लैब टेक्नीशियन की हड़ताल के चलते मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बृहस्पतिवार सुबह सिविल अस्पताल रोज की तरह खुला। ओपीडी में चिकित्सक भी बैठे, पर्चे भी बन रहे थे और दवाएं भी दी जा रही थीं। लेकिन थोड़ी देर में प्रमोशन में आरक्षण का विरोध कर रहे हड़ताली कर्मचारी वहां आ गए। हड़ताली कर्मचारियों को समर्थन देते हुए चिकित्सकों, फार्मेसिस्ट और कर्मचारियों आदि ने भी काम बंद कर दिया। हालांकि इमरजेंसी, पोस्टमार्टम और ब्लड बैंक की सेवाओं को मानवीय आधार पर सुचारु रखा गया। अस्पताल में कार्य बहिष्कार होने से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ा। दूरदराज से आए लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। फार्मेसिस्ट एसोसिएशन के जिला महामंत्री एसपी बड़ोला ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण के विरोध में कार्य बहिष्कार किया गया।

लैब में नहीं हुई खून की जांच
उत्तराखंड मेडिकल लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन के आह्वान पर सिविल अस्पताल के लैब टेक्नीशियन ने भी हड़ताल रखी। जिस कारण बृहस्पतिवार को लैब में खून की जांच नहीं हो पाई। एसोसिएशन 4200 पे ग्रेड की मांग कर रही है। लैब टेक्नीशियन अक्षय लाल, पवन कुमार और उमेश वर्मा आदि ने बताया कि इमरजेंसी, ब्लड बैंक और भर्ती मरीजों को सेवाएं दी जा रही हैं। 27 दिसंबर तक यदि उनकी मांगे पूरी न हुईं तो इसके बाद इन सेवाओं का भी बहिष्कार कर दिया जाएगा।

मरीजोें से बातचीत
उपचार के लिए आई थी। काफी देर से अस्पताल में भटक रही हूं। लेकिन पूरा अस्पताल खाली पड़ा है। परेशान होकर बिना उपचार के ही वापस जाना पड़ रहा है। - ओमवती, मोहम्मदपुर

कई दिन से तबियत खराब है। उपचार के लिए अस्पताल में आया था। लेकिन हड़ताल की वजह से उपचार नहीं मिल पाया। पता नहीं कब तक हड़ताल खुलेगी। बीमारी के कारण परेशान हूं। - सलीम, मंगलौर

पिछले कुछ दिनों से तबियत ठीक नहीं है। डाक्टर को दिखाने के लिए आया था। लेकिन डाक्टर नहीं मिले। अब बिना चिकित्सक को दिखाए ही वापस जाना पड़ रहा है। - अमित, हथियाथल

उपचार के लिए अस्पताल सुबह ही आ गई थी। लेकिन नंबर आने से पहले ही अस्पताल में हड़ताल हो गई। जिसके कारण डाक्टर देख नहीं पाए। अब वापस जाना पड़ रहा है। - गुड़िया, हथियाथल

इलाज के लिए काफी दूर से आई हूं। पर्चा बनवा लिया था। अब कह रहे हैं कि हड़ताल हो गई है। इसलिए आज नहीं देखेंगे। बीमारी के कारण अस्पताल में आने में काफी दिक्कत होती है। - जरीफन, खेलपुर

पांव की हड्डी टूटी हुई है। किराए पर गाड़ी कर अस्पताल आया था। लेकिन चिकित्सक नहीं मिले। दर्द के कारण काफी परेशानी हो रही है। गरीब होने की वजह से प्राइवेट में उपचार नहीं करा सकता हूं।
- विकास, दरियापुर

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एसबीआई छोड़ सभी बैंक रहे हड़ताल पर
रुड़की। बैंकिंग बिल के विरोध में बृहस्पतिवार को शहर और देहात स्थित बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस कारण लेनदेन न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि एसबीआई की सभी शाखाओं में प्रतिदिन की तरह से कामकाज हुआ। इसके अलावा प्राइवेट बैंक भी खुले रहे।
इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) के आह्वान पर आल इंडिया बैंक इंपलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) और बैंक इंपलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) ने बैंकिंग बिल के विरोध में एक दिन की हड़ताल रखी। इन संगठनों से जुड़े क्षेत्रीय बैंकों ने भी कामकाज बंद रखा। हालांकि एसबीआई की शाखाएं खुली रहने से लोगों को राहत मिली। एसबीआई रामनगर शाखा के प्रबधंक भूपेंद्र सिंह मलिक ने बताया कि उनके यहां कोई हड़ताल नहीं रही।

प्रतिदिन होता है 32 करोड़ का लेनदेन
शहर के बैंकों में प्रतिदिन 32 करोड़ रुपये का लेनदेन होता है। हड़ताल के कारण एसबीआई और प्राइवेट बैंकों को छोड़कर अन्य बैंकों में लेनदेन पूरी तरह से बंद रहा। इससे कारोबार भी प्रभावित हुए।

बैंक कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
बैंकिंग बिल के विरोध को लेकर बैंक कर्मचारियों ने सिविल लाइंस स्थित यूनियन बैंक की मुख्य शाखा पर बैठक की। इस दौरान सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन और नारेबाजी भी की गई। बैठक की अध्यक्षता यूएफबीयू के रुड़की इकाई संयोजक अनिल अग्निहोत्री ने की। बैठक में पीएनबी, सिंडिकेट, केनरा, ओबीसी बैंक यूनियन के पदाधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर राकेश सैनी, अनुज कुमार यादव, निकुंज जैन, संजय जोशी, प्रभाकर वर्मा, सौरभ सिंह, विजय कुमार, जेएस पंत, किशनलाल, पवन कुमार, विपिन कुमार, विक्रम, अतुल आदि मौजूद रहे।

तहसील में पूरी तरह ठप रहा कामकाज
रुड़की। मिनिस्ट्रीयल कर्मियों की तीन सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल और पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ कार्य बहिष्कार का तहसील में व्यापक असर देखने को मिला। तहसील कार्यालयों, रजिस्ट्रार और खाद्य आपूर्ति कार्यालय में कोई काम नहीं हो सका। बृहस्पतिवार को दिनभर लोग परेशान घूमते रहे।
बृहस्पतिवार सुबह ही हड़ताली कर्मचारियों ने तहसील के सभी कार्यालय, रजिस्ट्रार और खाद्य आपूर्ति कार्यालय बंद करा दिया। इस दौरान कर्मचारियों ने पदोन्नति में आरक्षण के बिल को संसद में पेश करने के विरोध में भाजपा और कांग्रेस के पुतलों के साथ प्रदर्शन किया। बाद में इन पुतलों को आग के हवाले कर दिया गया। प्रदर्शन करने वालों में राजेश पाल, राजेश कपिल, मीर सिंह, अनिल कुमार, गौतम शर्मा, संजय खाती सहित काफी संख्या में कर्मचारी शामिल थे। दूसरी तरफ सिंचाई विभाग, लीथो प्रेस, जिला उद्योग केंद्र के कर्मचारी भी कार्य बहिष्कार पर रहे।

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