महिलाओं पर भी नहीं हुआ रहम

Dehradun Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
देहरादून। लाठीचार्ज के दौरान पुलिस ने महिलाओं पर भी रहम नहीं किया। यही नहीं एक-एक शिक्षामित्र को कई पुलिस कर्मियों ने मिलकर पीटा।
चोट लगने के कारण चंपावत की कमला तो ठीक से चल भी नहीं पा रही थीं। वहीं, चंपावत की मीना मेहरा और राधिका बोरा के हाथ और पांव पर चोटें आई हैं। उत्तरकाशी की नरेसी देवी ने बताया कि महिलाओं पर पहले पानी फेंका गया और जब महिलाएं गिर पड़ी तो पुलिस ने उनपर उनके सिर और पैरों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दी। दून अस्पताल में भर्ती उत्तरकाशी की राजी रावत ने बताया कि कई शिक्षामित्रों को बेरहमी से पीटा गया। चमोली की लीला देवली, टिहरी के दीपक जोशी, पिथौरागढ़ के हीरा सिंह, नैनीताल के तारा सिंह, चंपावत की मीना ने बताया कि कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं और कई शिक्षा मित्रों के कपड़े फट गए। हरिद्वार के शिव कुमार, नैनीताल के दीवान सिंह, हरिद्वार के अंजस कुमार, नैनीताल के ओम प्रकाश के शरीर पर भी घाव के निशान पुलिस की बर्बरता को बयां कर रहे थे। घाट विकासखंड, चमोली के भरत भूषण के पेट पर गंभीर चोट के निशान हैं। भरत बताते हैं कि घुड़सवार पुलिस ने भी शिक्षामित्रों का पीछा कर जमकर लाठियां बरसाईं। इस दौरान तमाम शिक्षामित्रों के मोबाइल और पर्स गायब हो गए। वहीं, पौड़ी के राकेश देसवाल के कई स्थानों पर गुम चोटें हैं। पुलिस की मार से हरिद्वार के अजीत सिंह के कनपटी से खून बहने लगा।
पहले पीटा फिर अस्पताल पहुंचाया
देहरादून। गंभीर रूप से घायल हुए कई शिक्षा मित्रों को पुलिस ने जबरन धरना स्थल से उठाकर 108 एंबुलेंस से दून अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, शिक्षामित्र अस्पताल न जाने की बात पर अड़े हुए थे। वे शिक्षा मंत्री को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट हरक सिंह रावत ने पुलिस अधीक्षक दलीप सिंह कुंवर को घायलों को जबरन अस्पताल ले जाने के निर्देश दिए।
दून अस्पताल लाए गए शिक्षामित्र
लाठीचार्ज में घायल हुए हीरा सिंह, कमला पांडे, पुष्पा, मीना मेहरा, मीनाक्षी, राधिका, कामिनी, राम कुमार, दयानंद, प्रकाश चंद पांडे, शिव पाल, योगेश, रोजी रावत, लीला, दीपिका जोशी व तारा सिंह को दून अस्पताल लाया गया। चिकित्सकों के मुताबिक इनमें से 13 शिक्षामित्रों को भर्ती किया गया है। जबकि अन्य को प्राथमिक उपचार दिया गया।
‘पुलिस ने किया जानलेवा हमला’
देहरादून। कई संगठनों ने शिक्षामित्रों पर लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है। उत्तराखंड कर्मचारी शिक्षक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष महेश डोबरियाल ने कहा कि पुलिस ने शिक्षामित्रों पर जानलेवा हमला किया है। उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि जिस तरह महिलाओं पर लात घुसे बरसाए गए, उससे लगता है कि पुलिस ने बदले की भावना से यह कार्रवाई की। कई शिक्षा मित्रों के हाथ-पांव फ्रैक्चर हो गए हैं। प्रदेश सरकार अपने चहेतों को लाल बत्तियां बांट रही है, लेकिन शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने को तैयार नहीं है। उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव आनंद सिंह राणा ने इसे जनतंत्र पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्र लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। राजकीय शिक्षक संघ के सोहन माजिला ने कहा कि प्रकरण की जांच कर सरकार दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करे।
समाजवादी पार्टी ने शिक्षा मित्रों पर लाठीचार्ज की भर्त्सना की है। प्रदेश सचिव डा.आरके पाठक ने कहा कि पुलिस के लाठीचार्ज ने अंग्रेजों के समय की याद को ताजा कर दिया। जूनियर हाईस्कूल पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष अतुल शर्मा ने लाठीचार्ज को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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