खंडहर बन रहे सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण गांव

Dehradun Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
देहरादून। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भारत-तिब्बत सीमा से लगे गांव खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पिथौरागढ़ के कई गांवों की आधी आबादी पलायन कर चुकी है। हालत यह है कि सड़क न होने से मुनस्यारी ब्लॉक पिथौरागढ़ के कोट, बजेता और डुंगरी के ग्रामीणों को गांव तक पहुंचने के लिए 16 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ रही है, जबकि सीमांत उत्तरकाशी, बागेश्वर और चमोली जनपदों के गांवों में बिजली, स्वास्थ्य और पेयजल समस्या बनी हुई है। उत्तरकाशी की बडेत गांव की ग्राम प्रधान 72 वर्षीय चंद्रकला बिष्ट बताती हैं कि पलायन के चलते तमाम गांवों में बुजुर्ग और महिलाएं ही रह गई हैं।
एफआरआई में आयोजित निर्मल ग्राम पुरस्कार वितरण समारोह में शामिल होने पहुंचे ग्राम प्रधानों ने सीमा से लगे दूरदराज के गांवों की स्थिति बयां की। उन्होंने कहा कि इन गांवों में न तो बिजली है और न ही सड़क। स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था का भी बुरा हाल है। गांव तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को तीन से 16 किलोमीटर तक की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। नतीजतन सीमा से लगे गांव लगातार खाली हो रहे हैं। पलायन का यही हाल रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जनपद के गांव के गांव पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो जाएंगे। ग्राम फाफा ज्योलीकोट मुनस्यारी ब्लॉक जनपद पिथौरागढ़ के ग्राम प्रधान कुंवर सिंह बताते हैं कि कैठीबैंड से फाफा रिंगु तक पहुंचने के लिए 15 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। सड़क और यातायात सुविधा न होने से ग्रामीण पलायन को मजबूर हैं। पिथौरागढ़ मुनस्यारी ब्लॉक के सीमांत गांव खेतभराड़ की ग्राम प्रधान पार्वती देवी, सेलमाली के प्रधान भूपाल सिंह, भैंसखाल के त्रिलोक राम और मिशन चंडाक के ग्राम प्रधान पूरन सिंह के मुताबिक क्षेत्र के गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यही वजह है कि कोट, पंद्रहमाला, बजेता, डुंगरी आदि कई गांव खाली होते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि डुंगरी में डेढ़ दशक पहले तीन सौ की आबादी थी, लेकिन अब सौ परिवार भी नहीं हैं।
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पिछले 12 वर्षों से सड़क मार्ग अधूरा है। सड़क न होने से ग्रामीणों को चार किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है, क्षेत्र में हिमाचल के मोबाइल टावर काम करते हैं, लेकिन यहां के टावर से सिग्नल नहीं आता।-मोहन लाल, ग्राम प्रधान माकुडी, ब्लॉक मोरी, उत्तरकाशी
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तल्ली कुनीगाड से रामपुर तक सड़क के लिए कई बार प्रस्ताव के बाद भी सड़क नही बनी, मार्ग न होने से ग्रामीण परेशान हैं।-विमला देवी, ग्राम प्रधान कुनीगाड, ब्लॉक गैरसैंण, चमोली
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सीमांत गांवों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव से पलायन हो रहा है। तिलस्यारी, उडखुली, बगोटिया, गडखेत, जखेड़ा आदि गांवों में पलायन को लोग मजबूर हैं। -मदन मोहन भट्ट, ब्लॉक गरुड, जनपद बागेश्वर

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