नैनो टेक्नोलॉजी के फायदों के साथ नुकसान भी

Dehradun Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
देहरादून। ग्राफिक एरा विवि में यूकॉस्ट की ओर से आयोजित सातवीं साइंस कांग्रेस में दूसरे दिन विशेषज्ञों ने नए शोध कार्यों के बारे में बताया। नेशनल फिजिकल लेबोरेट्री (एनपीएल) के वैज्ञानिक डा. आरके कोटनाला ने नैनो टेक्नोलॉजी के दुष्प्रभावों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि इस टेक्नोलॉजी के दुष्प्रभावों पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। नैनो टेक्नोलॉजी प्रक्रिया से तैयार लिपस्टिक, सनस्क्रीन क्रीम जैसी चीजों के नैनो पार्टिकल्स त्वचा में प्रवेश करके खून में मिल जाते हैं। यह पार्टिकल्स हीमोग्लोबिन को भी प्रभावित करते हैं। इनसे स्किन कैंसर से लेकर लंग कैंसर तक का खतरा हो सकता है। यह डीएनए को भी डैमेज करते हैं।
डा. कोटनाला ने बताया कि इनके दुष्प्रभाव को लेकर पूरी दुनिया में तो गंभीरता नजर आने लगी है, लेकिन भारत में नहीं। नैनो टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री का वेस्ट भी जमीन पर बिना सुरक्षित प्रक्रिया के डाल दिया जाता है, जो फिर फूड चेन के जरिए हमारे शरीर में जाता है। इसपर रोक की जरूरत है। दुष्प्रभाव को देखते हुए एस्बेस्टोस जैसी चीजों पर यूएसए आदि देशों ने रोक लगा दी है, लेकिन भारत में अब यह बनाया जा रहा है। इसका प्रभाव इतना धीरे होता है कि इसे समझ पाना बेहद मुश्किल है।

बायोचार से पानी होगा पीने लायक
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ एन्वयारनमेंटल साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर डा. दिनेश मोहन ने बायोमास से बायोफ्यूल बनाने के दौरान बचे बायोचार (कोयला) की उपयोगिता के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि बायोचार को यदि मिट्टी में मिला दिया जाए तो यह कार्बन डाइऑक्साइड को सोख लेता है। उन्होंने बताया कि जिन इलाकों के पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे घातक रसायन होते हैं वहां इसका बेहतर प्रयोग हो सकता है। बायोचार के पाउच बनाकर उसमें डालने से पीने लायक पानी तैयार हो सकता है। यह काफी सस्ती प्रक्रिया है।

खोज और भी...
एफआरआई की शोध छात्रा हिमाली पांडेय ने पेड़ों में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट गुणों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि बांस के पत्ते, शीशम और साल के बुरादे में यह गुण पाया जाता है, जिसका कई क्षेत्रों में उपयोग हो सकता है। ग्राफिक एरा विवि के चेयरमैन प्रो. कमल घनशाला ने भी शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने 3000 लोगों पर आईटी संबंधित सर्वे किया और पाया कि राज्य में आईटी योजनाओं के विषय में बहुत कम लोग जानते हैं।

पोस्टर के जरिए भी समझाई बात
साइंस कांग्रेस में 15 विषयों पर करीब 594 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसमें ओरल शोध पत्रों के साथ ही पोस्टर शोध पत्र भी लगाए गए। पोस्टर के जरिए बेहद सरल तरीके से शोध प्रस्तुत किए गए। पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पादकता में महिलाओं की भागीदारी से लेकर नैनो साइंस के दवाईयों में प्रयोग आदि के पोस्टर लगाए गए। बृहस्पतिवार को साइंस कांग्रेस में यूकॉस्ट के डीजी डा. राजेंद्र डोभाल, विशेषज्ञ डा. राजेश्वरी एस रैना, डा. एसएमएच कादरी, डा. उमा मलकानिया, डा. बीआर अरोड़ा, डा. सरिता खंडका, डा. प्रशांत सिंह, सुभाष गुप्ता, डा. यूसी कुलश्रेष्ठ, डा. अरुनाभा मजूमदार आदि भी मौजूद रहे। रसायन मेले और प्लेनेटोरियम को देखने के लिए भी विभिन्न स्कूलों के बच्चे पहुंचे।

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