सिर्फ सात माह में लगा दी एफआर

Dehradun Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
देहरादून। राजधानी में इंस्टीट्यूट खोलकर करोड़ों की धोखाधड़ी करने के आरोपी दंपति को तलाशने में दून पुलिस ने कितनी गंभीरता दिखाई इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र सात महीने में ही पुलिस ने इस मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगा दी। सामान्य तौर पर पुलिस ऐसे मामलों में सालों तक विवेचना जारी रखती है।
रत्नागिरी में आर्थिक अपराध शाखा द्वारा गिरफ्तार किए गए धोखाधड़ी के आरोपी दंपत्ति की देहरादून पुलिस को करीब चार साल से तलाश है। आरोपी दंपति डॉ. राजकुमार माहेश्वरी और डॉ. प्रीति माहेश्वरी पर राजश्री कॉम्प्लेक्स टैगोर विला, देहरादून में एक साइकोथेरेपी इंस्टीट्यूट खोलकर उसमें एडमिशन के नाम पर करोड़ों रूपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है। करणपुर निवासी सावित्री वर्मा ने उनके खिलाफ देहरादून कोतवाली में 14 जनवरी को मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन इतने गंभीर मामले में भी दून पुलिस ने कतई गंभीरता नहीं दिखाई। मात्र सात महीने बाद 19 अगस्त 09 को विवेचनाधिकारी महेश्वर प्रसाद ने यह कहते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी कि आरोपियों को कई बार तलाश किया परंतु वे नहीं मिले इसलिए मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगाई जा रही है।
पुलिस की विवेचना यह बताती है कि आरोपियों की तलाश के लिए गंभीर प्रयास किए ही नहीं गए। अंतिम रिपोर्ट में कहीं भी उन प्रयासों का जिक्र नहीं किया गया है जिनके आधार पर अंतिम रिपोर्ट लगाई गई है। विवेचनाधिकारी की अधिकतर कार्रवाई केवल पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज करने और अधिकारियों को रिपोर्ट भेजने तक ही सीमित रही। बड़ी बात यह भी है कि छोटे-छोटे मामलों में कई बार जवाब-तलब करने वाले अधिकारियों ने भी इस प्रकरण में दिलचस्पी लेने के बजाए अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और फाइल बंद करा दी। एसएसपी केवल खुराना ने बताया कि मामला गंभीर है। अंतिम रिपोर्ट खारिज कर उसकी फाइल दोबारा खोली जाएगी।


और भी हैं लेनदार
देहरादून। धोखाधड़ी के आरोपी दंपति ने एडमिशन के नाम पर तो पैसा ठगा ही जिन दुकानदारों और विज्ञापन एजेंसियों से व्यापारिक रिश्ते बनाए उनके पैसे भी बिना दिए ही फरार हो गए। ऐसे कई लोग भी उस समय दंपति को काफी तलाशते रहे। दून में विज्ञापन एजेंसी चलाने वाले आरसी उनियाल ने बताया कि दंपति ने अपने इंस्टीट्यूट के प्रचार-प्रसार के लिए उनकी एजेंसी से भी संपर्क किया था। लेकिन बाद में उनका भी भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने इस सम्बंध में मुकदमा भी किया था।

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