एफडीआई पर उखड़े बीमा अधिकारी, कर्मी

Dehradun Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST
देहरादून। सरकार की नीतियां राष्ट्र, श्रम विरोधी हैं। एफडीआई और बीमा क्षेत्र में इक्विटी की सीमा को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 51 प्रतिशत कर दिए जाने का कदम उठाकर उसने यही संकेत दिए हैं। इससे देश को बड़ा नुकसान होगा। अगर यह कदम वापस न हुआ तो आगामी दिसंबर के महीने में संसद को घेरा जाएगा। नेशनल आर्गेनाइजेशन आफ इंश्योरेंस आफिसर्स (नोइनो) की अखिल भारतीय कार्यकारी बैठक के पहले दिन वक्ताओं ने यह बात कही।
दो दिवसीय यह बैठक सोमवार से चकराता रोड स्थित एक होटल में शुरू हो हुई। भारतीय जीवन बीमा निगम के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक टी अधिकारी ने दीप जलाकर इसका शुभारंभ किया। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के आयोजन सचिव पवन कुमार ने विभिन्न उदाहरणों के जरिए सरकार के वित्तीय कदमों के नुकसान गिनाए। नोइनो के कार्यकारी अध्यक्ष एस शरण ने संगठन की बीते साल की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। महासचिव ने संगठन की उपलब्धियों के बारे में बताया। इस दौरान नोइनो के स्थानीय सचिव ऋषि मल्होत्रा, संगठन मंत्री राजेश द्विवेदी आदि का सहयोग रहा।

ग्रीस, इंडोनेशिया जैसा हाल न हो
सरकार के गलत वित्तीय कदमों का खामियाजा आम जन को कैसे भुगतना पड़ सकता है, इसके उदाहरणों के तौर पर बीएमएस के फाइनेंशियल सेक्टर इंचार्ज उदय राव पटवर्धन ने ग्रीस, इंडोनेशिया का हवाला दिया। कहा कि वित्तीय तौर पर इन देशों की कमर टूट चुकी है।

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