गरजते हैं, बरसते नहीं हाकिम

Dehradun Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
गरजने वाले बादल कभी बरसते नहीं! जिला प्रशासन इस कहावत को सही साबित करने में जुटा हुआ और बहुत हद तक इसमें सफल भी रहा। बात अतिक्रमण की हो या ट्रैफिक अव्यवस्था की, नियमों का मखौल उड़ने वाले बेखौफ हैं। होना तो यह चाहिए कि नियम तोड़ने से पहले कोई भी इंसान अंजाम के बारे में सौ बार सोचे। लेकिन, दून में यह डर कभी नजर नहीं आया। तमाम चेतावनियों के बावजूद न दुकानदार अतिक्रमण हटाने को राजी हैं और न बेलगाम हो चुके विक्रमों के मालिक। परिवहन विभाग का जरा भी खौफ होता तो राजधानी की सड़कों से फर्जी नंबर प्लेट लगाकर दौड़ रहे विक्रम अबतक साफ हो चुके होते।

विक्रमों के आगे बौना हुआ आरटीओ
देहरादून। अक्तूबर में राजधानी की सड़कों पर दौड़ रहे सभी विक्रमों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगा दी जाएगी। सितंबर में यह निर्देश जारी करते हुए आरटीओ सुधांशु गर्ग ने कहा था कि नंबर प्लेट न लगाने वाले विक्रमों को सीज कर दिया जाएगा। गिनती के विक्रम चालकों ने इस आदेश का अमल किया, लेकिन एक भी वाहन सीज नहीं किया गया है।
दून की यातायात व्यवस्था कैसे सुधरेगी, जब अधिकारी महज दावे और आदेश करके लगातार गंभीर होती जा रही इस समस्या को भूल जाते हैं। ट्रैफिक व्यवस्था के लिए नासूर बन चुकीं सिटी बसों और विक्रमों पर लगाम कसने में परिवहन विभाग नाकाम साबित हुआ है। विक्रमों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का तय समय बीते तीन दिन हो चुके हैं। पूरे महीने में सिर्फ 201 विक्रमों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाई गई। जबकि करीब 1400 विक्रमों अब भी पुरानी नंबर प्लेटों केसाथ दौड़ रहे हैं। अब आरटीओ की ओर से अगले सप्ताह में एक टीम बनाकर पूरे शहर में अभियान चलाने की बात कही जा रही है।
क्यों जरूरी है नई नंबर प्लेट
देहरादून में काफी विक्रम फर्जी नंबर प्लेट पर संचालित हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में करीब 1600 विक्रम ही पंजीकृत हैं। इस आंकड़े में दून केआसपास केक्षेत्रों में दौड़ रहे विक्रम भी शामिल हैं। जबकि हकीकत यह है कि सड़कों पर विक्रमों की संख्या इससे कहीं अधिक है। फर्जी नंबरों पर चल रहे विक्रम कई बार पकड़े जा चुके हैं, लेकिन कभी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। इससे जहां सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या खड़ी हो रही है, वहीं सरकार को राजस्व का चूना लग रहा है। यदि दावे के अनुसार हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगा दी जाती है तो आधे से अधिक विक्रमों का संचालन बंद हो जाएगा।


आंख दिखाकर लौटी टीम
देहरादून। अतिक्रमणकारियों के आगे प्रशासनिक अमला बेबस है। दो दिन से चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान से तो यही साबित हो रहा है। इस धरणा को झूठा साबित करने के लिए कड़ी कार्रवाई की जरूरत है, जिसकी हिम्मत अधिकारी नहीं जुटा पा रहे हैं। पहले दिन अभियान के नाम पर रस्म अदायगी करने के बाद दूसरे दिन भी कोई कड़ी कार्रवाई होती नजर नहीं आई। कुछ जगह सख्ती की कोशिश हुई तो दुकानदार अड़ गए। नगर निगम और प्रशासन की टीम भी विवाद से बचते हुए सिर्फ चेतावनी देते हुए निकल गई। सिटी मजिस्ट्रेट दुकानदारों को अतिक्रमण न करने की चेतावनी देते रहे, लेकिन इसका असर नजर नहीं आया। टीम के जाते ही पल्टन बाजार में फिर फुटपाथ पर सामान बिछ गया था।
पहले से थी अभियान की सूचना
दूसरे दिन सिटी मजिस्ट्रेट हरक सिंह रावत के नेतृत्व में दुपहर 12 बजे पलटन बाजार से अभियान की शुरुआत हुई। लेकिन, बाजार में पहले ही अभियान की सूचना मिल चुकी थी, इसीलिए फुटपाथ साफ नजर आए। टीम को देखते ही दुकान के बाहर लगा सामान भी समेट लिया गया। कुछ जगह प्रशासनिक टीम ने यह काम किया, लेकिन परेशानी की असल वजह आज भी अनदेखी रही। इसके बाद जब टीम हनुमान चौक पहुचीं। यहां दुकानें कई-कई फीट आगे बढ़ी हुई थीं, लेकिन अधिकारी सिर्फ सामान दुकान के अंदर रखने की बात कह कर निकल गए।
चालान काटने पर विवाद
टीम के धामावाला बाजार पहुंचने पर एक बर्तन की दुकान के आगे कबाड़ पाए जाने पर सिटी मजिस्ट्रेट ने दुकान का चालान काटने को कहा। यहां पर दुकानदार ने इसका विरोध किया। इस बीच अन्य दुकानदार भी पहुंच गए और उन्होंने टीम के साथ चल रहे वाहनों को रोकना शुरू कर दिया। इस पर सिटी मजिस्ट्रेट हरक सिंह रावत की दुकानदारों के साथ काफी गरमा गरमी हो गई। एक समय मामला बिगड़ता दिख रहा था, लेकिन बाद में दुकानदार वापस लौट गए।
सिर्फ एक फड़ नजर आई
मोतीबाजार सब्जी मंडी में सड़क पर लगाई गई आलू प्याज की फड़ को कब्जे में लेने पर निगम कर्मचारियों और दुकानदारों के बीच काफी छीना झपटी हुई। यहां भी सिटी मजिस्ट्रेट रावत का दुकानदारों के साथ काफी विवाद हुआ। टीम ने दुकान के आगे रखी लोहे की फड़ के अलावा यहां एक ठेली को भी कब्जे में लिया। इसके अलावा इस बाजार में हर कदम पर फैला अतिक्रमण टीम को नजर नहीं आया।
पटाखे बेचने पर दुकान सील
मोतीबाजार बाजार के बाद टीम डिस्पेंसरी रोड, पलटन बाजार होते हुए आढ़त बाजार पहुंची। यहां पर एक जनरल मर्चेंट की दुकान पर पटाखे बेचे जा रहे थे। इस पर सिटी मजिस्ट्रेट रावत ने उक्त दुकान को सील कर दिया।
दिखावे के लिए थी पुलिस फोर्स
टीम के साथ पांच पुरुष पुलिस कर्मी और तीन महिला पुलिस कर्मी ही थी। जबकि सिर्फ एक पुलिस कर्मी के पास डंडा था। इससे यह हुआ कि टीम के साथ बहस करने वालों को कई बार सिटी मजिस्ट्रेट ने जीप में बिठाने को कहा, लेकिन कोई पुलिस कर्मी आगे नहीं आया।

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