पहाड़ पर भी उगाइए पॉपलर, सीएम ने वैज्ञानिकों से कहा-संभावनाएं तलाशिए

Dehradun Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
देहरादून। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के वैज्ञानिकों से राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में पॉपलर की संभावना तलाशने को कहा। ताकि पहाड़ के किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद मिल सके। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय पॉपलर आयोग की 46वीं कार्यकारिणी की बैठक का उद्घाटन करते हुए उन्होंने यह बात कहीं।
बहुगुणा ने कहा कि प्रदेश के मैदानी जिलों में पॉपलर की खेती हो रही है, लेकिन पहाड़ों पर नहीं। उन्होंने पहाड़ की भौगोलिक परिस्थिति के अनुरूप पॉपलर की किस्में विकसित करने पर जोर दिया। इसके लिए प्रदेश सरकार भी सहयोग करेगी। इस मौके पर एफएओ की वन प्रबंधन डिवीजन के निदेशक एड्डवर्ड मनसुन ने कहा कि स्थायी विकास, निर्धनता निवारण, ग्रामीण विकास, भूमि संरक्षण और वानिकी में पॉपलर की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय पॉपलर आयोग के चेयरमैन सीफानो बिसोफी ने कहा कि पॉपलर की मदद से विश्व के ग्रामीण क्षेत्रों में संपन्नता लाई जा सकती है। इस कार्यशाला से देश विदेश के पॉपलर उत्पादकों, विशेषज्ञों को अपने अनुभव साझा करने का एक बेहतर मौका मिलेगा। आईसीएफआरई के महानिदेशक वीके बहुगुणा ने कहा कि पॉपलर के माध्यम से दस लाख उत्तर भारतीय किसान लाभान्वित हो रहे हैं। इसकी सहायक गतिविधियों से एक करोड़ मानव श्रम दिवस का सृजन हुआ है। इस अवसर पर एफआरआई के निदेशक पीपी भोजवैद सहित 30 देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

पॉपलर बदल सकता है किसानों की किस्मत
बिहार का वैशाली बना मॉडल जिला
बिहार के अन्य जिलों में शुरू होगी पॉपलर की खेती
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। पॉपलर उत्पादन में बिहार का वैशाली पूरे देश में माडल जिले के रूप में उभरकर सामने आया है। पॉपलर की खेती ने बीते छह साल में इस जिले के 1250 गांवों में 35 हजार किसानों की किस्मत बदल दी है। इससे उत्साहित होकर बिहार सरकार 17 अन्य जिलों में भी पॉपलर की खेती शुरू करने जा रही है। वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पॉपलर सम्मेलन में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के निदेशक रिसर्च संदीप त्रिपाठी ने यह प्रजेंटेशन दिया।
उन्होंने बताया कि वैशाली में पॉपलर को बढ़ावा देने के लिए योजना आयोग से आईसीएफआरई को 18 करोड़ रुपये मिले थे। 2005 के बाद वैशाली में पॉपलर के 75 लाख पौधे लगाए गए थे। अब यहां प्लाइवुड इंडस्ट्री लगनी शुरू हो गई है। आईसीएफआरई की देखरेख में किसानों की लगभग 700 नर्सरियां तैयार कराई गई। इससे किसानों को अलग कमाई हुई। इसके लिए हल्द्वानी से पौधों की आपूर्ति की गई थी। उन्होंने बताया कि देश में अभी लगभग साढ़े तीन लाख हेक्टेयर भूमि पर पॉपलर की खेती की जा रही है। इसमें हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के मैदानी जिले शामिल है। इसके बाद स्वीडन के मार्टिन वेह, कनाडा के जिम रिचडसन, न्यूजीलैंड, चीन सहित अन्य देशों के विशेषज्ञों ने अपने-अपने देशों में पॉपलर के महत्व पर प्रकाश डाला।

पॉपलर, यूकेलिप्टस से भू-जल स्तर नीचे नहीं जाता
देहरादून। पॉपलर और यूकेलिप्टस से भू-जल स्तर नीचे नहीं जाता। ये दोनों प्रजातियां कम पानी में भी बच सकती हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किये गए शोध में यह तथ्य सामने आया है। वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डा.दिनेश कुमार ने बताया कि पॉपलर और यूकेलिप्टस की जड़ें सीधे नीचे की ओर जाती है। चारों तरफ नहीं फैलती। इसके कारण अधिक पानी सोखने का सवाल ही नहीं है। ये दोनों पेड़ कम या अधिक पानी में जीवित रह सकते हैं। यह बात बिल्कुल गलत है कि पॉपलर और यूकेलिप्टस के पौधे से जमीन बंजर हो जाती है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के महानिदेशक डा.वीके बहुगुणा ने बताया कि आम लोगों में भ्रम को दूर परिषद की ओर एक पुस्तक का प्रकाशन किया जा चुका है, जिसमें सभी तथ्यों को समाहित किया गया है।

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