विक्रम हत्याकांड में तीन गिरफ्तार

Dehradun Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
विकासनगर। सहसपुर पुलिस और एसओजी ने विक्रम हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। हत्या के आरोप में पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपियों ने विक्रम के साथ मिलकर कैश वैन लूट की योजना बनाई थी। विक्रम द्वारा आनाकानी करने पर उसे गोलियों से भून दिया गया। पुलिस ने आरोपियों से हत्या में इस्तेमाल की गई तीन पिस्टल, मैग्जीन, कार्टेज और कार बरामद कर ली है।
झाझरा पुलिस चौकी में पत्रकार वार्ता में एसएसपी नीरू गर्ग ने बताया कि रविवार को मुखबिर से सूचना मिली कि हत्याकांड में शामिल तीनों आरोपी कार में सहारनपुर-बेहट रोड से देहरादून आ रहे हैं। सूचना पर थानाध्यक्ष सूर्यभूषण नेगी और एसओजी इंचार्ज दिगपाल कोहली के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने दार्रारेट चेक पोस्ट पर चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान सहारनपुर की ओर से एक कार आती दिखाई दी। रोकने पर उसमें सवार तीन युवक भागने का प्रयास करने लगे। पुलिस ने तीनों को दबोच लिया। पकडे़ गए युवकों की पहचान रेनू कुमार उर्फ सोनू , अरशद, शाह फैसल उर्फ मोटा तीनों निवासी मेघ छप्पर थाना कुतुबशेर जिला सहारनपुर उत्तर प्रदेश हाल निवासी सेवलाकला देहरादून के रूप में हुई। आरोपियों ने पूछताछ में विक्रम की हत्या की बात कबूली। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने विक्रम की पल्सर बाइक और एक मोबाइल जंगल से बरामद कर लिया। पुलिस आरोपियों का क्राइम रिकार्ड भी खंगाल रही है। मालूम हो कि 23 अक्तूबर को सिक्योरिटी एजेंसी कैश वैन चालक क्लेमनटाउन निवासी विक्रम सिंह की हत्या कर शव तिमली के जंगल में फेंक दिया गया था। उसके शरीर में गोली के आठ निशान मिले थे। इस मौके पर एसपी देहात जीसी ध्यानी, सीओ प्रकाश चंद आर्य मौजूद रहे।

विक्रम की गलती से पकड़े गए हत्यारे
विक्रम हत्याकांड के खुलासे में एसओजी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विक्रम और लूट की योजना के सूत्रधार रेनू उर्फ सोनू ने काफी पुख्ता योजना तैयार की थी। सोनू ने एक फर्जी आईडी का सिम विक्रम को दिया था। उसी के जरिए वह विक्रम से बात कर लूट की सारी योजना बना रहा था। इसके लिए उसने अलग फोन भी लिया था। लेकिन विक्रम ने कई बार अपने असली मोबाइल पर वह सिम लगाकर सोनू से बात की थी। उसकी यही गलती उसके हत्यारों तक पहुंचने की सीढ़ी बनी। एसओजी ने जब उसके मोबाइल की कॉल डिटेल निकाली तो कुछ हाथ नहीं लगा। इसके बाद उसके मोबाइल का आईएमईआई(इंटरनेशलन मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटीफाइंग) नंबर रन करवाया गया। जिसमें पता चला एक और नंबर उसके मोबाइल पर कभी कभी चलता था। जिससे वह सिर्फ एक ही नंबर पर बात करता था। यह नंबर सोनू का था। इसी के आधार पर पुलिस सोनू तक पहुंची और फिर अन्य आरोपियों तक।

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