झोलाछाप डाक्टर ने झोंका फायर,मौत

Dehradun Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
विकासनगर। कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत मेहूंवाला गांव में रुपयों के लेनदेन को लेकर एक झोलाछाप डाक्टर ने एक व्यक्ति पर तमंचे से फायर झोंक दिया। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने आरोपी झोलाछाप को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार लाइन जीवनगढ़ निवासी विनोद कुमार पुत्र परमचंद कई सालों से मेहूंवाला गांव में क्लीनिक चलाता है। उसने डांडा जीवनगढ़ निवासी 40 वर्षीय नसीम पुत्र रसीद से दो साल पहले 25 हजार रुपये कर्ज लिया था। कुछ माह से वह कर्ज की किस्त नहीं दे पा रहा था। जिसे लेकर आए दिन नसीम उसके क्लीनिक पर जाकर पैसे लौटाने का दबाव बनाता आ रहा था। शनिवार सुबह करीब 10.30 बजे नसीम अपने पैसे मांगने के लिए विनोद के क्लीनिक पर पहुंचा। इस दौरान उनके बीच लेनदेन को लेकर नोकझाेंक हुई। इस बीच विनोद ने नसीम पर तमंचे से फायर झोंक दिया। नसीम लहुलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा। विनोद कुमार मौके से फरार हो गया। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पडे़। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने लहूलुहान नसीम को 108 आपातकालीन सेवा से अस्पताल भेजा, जहां से उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। राजधानी के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। कोतवाल रघुवीर असवाल ने बताया कि आरोपी क्लीनिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके पास से तमंचा भी बरामद कर लिया गया। गांव में गोलीकांड की वारदात से लोग सकते में हैं। क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं रहीं।

मैंने नहीं चलाई गोली
विकासनगर। हत्यारोपी क्लीनिक संचालक विनोद कुमार का कहना है कि उसने नसीम पर फायर नहीं झोका। नसीम उसे डराने के लिए अपने साथ ही तमंचा लेकर आया था। उसने क्लीनिक में उस पर तमंचा तान दिया, जिससे वह घबरा गया। इस दौरान बीचबचाव और खींचतान में तमंचे से निकली गोली नसीम पर जा लगी। नसीम कई दिनों से दुकान में आकर उसे रुपये लौटने के लिए धमका रहा था। मेरे पास खाने को आटा तक नहीं है, तमंचा कहां से लाऊंगा।


झोलाछाप है आरोपी
हत्यारोपी विनोद कुमार झोलाझाप डाक्टर है। उसकी शैक्षिक योग्यता भी सिर्फ इंटर है। पिछले बारह सालों से वह मेहूवाला गांव में क्लीनिक चला रहा है। बताया जा रहा है इससे पूर्व वह चिकित्सकों के क्लीनिक पर काम करता था। वहीं थोड़ी बहुत दवाओं का ज्ञान हो गया।

बेटी के इलाज को
थी पैसे की जरूरत
विकासनगर। परिजनों के अनुसार नसीम को बेटी के इलाज के लिए पैसे की जरूरत थी। वह फर्नीचर का काम करता था और लोगों को ब्याज पर पैसे देता था। गांव में क्लीनिक का संचालन करने वाले झोलाछाप डाक्टर विनोद को भी उसने कर्ज दिया था। शनिवार को वह पैसे की जरूरत होने के कारण वह उसके क्लीनिक पर गया था। अस्पताल में उसकी मौत की खबर मिलते ही उसके घर में मातम छा गया। उसकी पत्नी अकबरी और बेटियां इयतीशाम और शबाना का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन बमुश्किल उन्हें ढांढस बंधा पा रहे हैं। नसीम के बुजुर्ग पिता रसीद और मां नानकी भी अपने को नहीं संभाल पा रहे हैं।

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