कार्बेट के बफर एरिया में निर्माण कार्यों को रोकना होगा चुनौती

Dehradun Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
देहरादून। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी (एनटीसीए) की गाइड लाइन का कार्बेट में अनुपालन कराना बड़ी चुनौती साबित होगा। खासकर बफर एरिया के आसपास निर्माण कार्यों पर अंकुश लगाने में कार्बेट के अफसरों को पसीने बहाने पड़ेंगे। क्योंकि, यहां पर नेताओं और नौकरशाहों से लेकर माफिया तक ने जमीन खरीद रखी है।
देश के दूसरे टाइगर रिजर्व से कार्बेट की स्थिति बिल्कुल अलग है। जितने बाघ कार्बेट के कोर एरिया में हैं, लगभग उतने ही बफर एरिया में भी हैं। लेकिन बफर एरिया के आसपास बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों की जमीनें बिक चुकी हैं। इन जमीनों के खरीददार नेता, अफसर और माफिया हैं। इसमें से तो कई रिजार्ट भी बना चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद सरकारी मशीनरी और कार्बेट प्रशासन बफर एरिया के आसपास निर्माण कार्यों पर रोक नहीं लगा पाया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ताक पर रखकर 2004 में कार्बेट के जमूण में एक रिजार्ट को लाभ पहुंचाने के लिए पांच किलोमीटर लंबी सड़क बना दी गई थी। 19 अगस्त 2012 को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इंपावर कमेटी ने प्रदेश सरकार को इसे बंद करने का आदेश दिया था। साथ ही कार्बेट के आसपास गैर वानिकी कार्यों पर भी रोक लगाई गई थी। ऐसे में सवाल यह है कि नए आदेश को प्रदेश सरकार कितनी सख्ती से अनुपालन करती है।

गाइड लाइन के अहम बिंदु
>> नियंत्रित तरीके से हो पर्यटन गतिविधियां
>> टाइगर रिजर्व बनाएं संरक्षण और पर्यटन प्लान
>> हर टाइगर रिजर्व अपने स्तर पर पर्यटन क्षमता का आंकलन करे
>> लोक एरिया कमेटी का गठन
>> बफर एरिया के आसपास और कॉरिडोर के बीच में निर्माण पर रोक
>> स्टे होम गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए

एनटीसीए के गाइड लाइन का अध्ययन किया जा रहा है। इसे सख्ती से लागू कराने की कोशिश की जाएगी। जरूरत के अनुसार जिला प्रशासन की भी मदद ली जाएगी। क्योंकि, निर्माण कार्यों को प्रशासन की मदद से ही रोका जा सकता है। -- रंजन कुमार मिश्रा, निदेशक कार्बेट टाइगर रिजर्व

देश के किसी भी टाइगर रिजर्व के कॉरिडोर में किसी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। इसे स्थानीय स्तर पर क्रियान्वित करना है। स्टे होम जैसी पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है, जिससे रिजार्ट कल्चर पर अंकुश लग सके। - डा.वाईके झाला, वैज्ञानिक, भारतीय वन्यजीव संस्थान

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