‘क्लेम निरस्त करने की जुगत में रहती हैं बीमा कंपनी’

Dehradun Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
देहरादून। एक फैसले में उपभोक्ता फोरम ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि बीमा कंपनी क्लेम निरस्त करने की जुगत भिड़ाने में लगी रहती हैं। फोरम ने स्पष्ट किया है कि बीमा क्लेम में देरी निरस्तीकरण की कोई वजह नहीं मानी जा सकती। कंपनी अफसरों की कार्यशैली को संवेदनहीन करार देते हुए फोरम ने कंपनी को प्रभावित महिला को बीमा की रकम, वाद खर्च और हर्जाना चुकाने का आदेश दिया है। फोरम ने कहा है कि कंपनी चाहे तो क्लेम निरस्त करने वाले अधिकारियों से हर्जाने की वसूली कर सकती है।
बहसूमा (मेरठ) निवासी मनोज कौशिक ने वर्ष 2004 में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से पांच लाख की जीवन बीमा पॉलिसी ली थी, जो 2019 तक वैध थी। 2006 में नई दिल्ली में एक हादसे में कौशिक की मौत हो गई। कौशिक की पत्नी संजू को इस पालिसी की जानकारी नहीं थी। वर्ष 2008 में पता चलने पर उन्होंने कंपनी में क्लेम किया। लेकिन, कंपनी ने बीमा रकम देने से इनकार कर दिया। कंपनी का कहना था कि महिला को पति की मृत्यु के डेढ़ माह के भीतर क्लेम करना चाहिए था, अब कुछ नहीं हो सकता।
संजू ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत की। इस पर फैसला देते हुए फोरम ने कंपनी को क्लेम की रकम, एक लाख रुपये हर्जाना और 25 हजार रुपये अदालती खर्च देने के आदेश दिए।

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