83 साल से बापू की धरोहर संजोए है दून

Dehradun Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
देहरादून। आजादी की जंग में पूरा देश महात्मा गांधी के पीछे हो लिया था। देशवासियों के इस जज्बे में अहिंसा का रंग भरने गांधी देश भर का दौरा कर रहे थे। इस बीच कई कार्यक्रमों में भी उन्होंने हिस्सा लिया। 83 साल पहले दून में कई जगह बापू के चरण पड़े। दून आज भी उनकी यादगार के रूप में यह धरोहर समेटे हुए है।
16 अक्तूबर, सन् 1929। यह वह दिन था, जब बापू के कदम दून में पड़े। वह यहां तिलक रोड स्थित बाल वनिता आश्रम की आधारशिला रखने पहुंचे थे। यज्ञ-हवन के बीच यहां की आधारशिला रखी गई। आश्रम की दीवार पर सजी गांधी की बड़ी-सी तस्वीर और जगह-जगह लगे इस कार्यक्रम के पत्थर इसके मूक गवाह हैं।
इसके ठीक अगले दिन यानी 17 अक्तूबर, सन् 1929 को महात्मा गांधी का कार्यक्रम ओल्ड राजपुर स्थित क्रिश्चियन रिट्रीट सेंटर (मसीही ध्यान केंद्र) में था। उन्होंने यहां पीपल का एक पौधा रोपा, जो आज भी विशाल वट-वृक्ष के रूप में यहां परिसर में खड़ा है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हाथों हुए इस कार्यक्रम के अभिलेख के रूप में चबूतरे पर ही एक पत्थर लगाया गया है। राष्ट्रपिता के दून आगमन के क्रम में डीएवी में 1946 में हुई सभा का भी उल्लेख अप्रासंगिक नहीं। उस वक्त यह कालेज नहीं स्कूल के रूप में मौजूद था। यहां उन्होंने देशभक्ति और अहिंसा से ओत-प्रोत भाषण के जरिए हर किसी को स्वतंत्रता के लिए उठ खड़ा होने के लिए उद्वेलित कर दिया।

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