चुनौतियों से और ‘चमकी’ खादी

Dehradun Updated Tue, 02 Oct 2012 12:00 PM IST
देहरादून। आजादी के आंदोलन में हर देशभक्त की पहचान समझी जाने वाली खादी का क्रेज आज भी बरकरार है। फैशन के दौर में चुनौतियां बहुत हैं लेकिन उत्तराखंड में खादी सब बाधाओं को पार कर अपनी चमक बिखेरने में कामयाब रही है। वक्त और बाजार की जरूरत के हिसाब से आए बदलावों का ही परिणाम है कि खादी का टर्नओवर एक साल में ही चालीस फीसदी तक बढ़ गया है।

राज्य सरकार कदम बढ़ाए तो और लाभ
इन दिनों खादी भंडारों में केंद्र सरकार की ओर से पंद्रह प्रतिशत की छूट दी जा रही है। लेकिन, राज्य सरकार की ओर से ऐसी कोई घोषणा अब तक नहीं हुई है। कुछ वर्ष पूर्व तक राज्य की ओर से छूट दो अक्तूबर से पहले ही घोषित कर दी जाती थी। लेकिन, अब नवंबर तक छूट तय होती है। नतीजतन खरीदारी पर असर पड़ता है। माना जा रहा है कि अगर सरकार ठीक से पहल करे तो फायदा काफी बढ़ सकता है।

दो सौ को मिलेगा रोजगार
जल्द ही प्रेमनगर और दीपनगर में खादी का उत्पादन कार्य प्रारंभ हो जाएगा। राज्य खादी ग्रामोद्योग आयोग ने दोनों प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी है। खास बात यह है कि दोनों केंद्रों में करीब दो सौ कारीगरों को काम मिलेगा, जबकि इनसे दो करोड़ रुपये वार्षिक आय की उम्मीद है।

रैंप पर भी दिख रही खादी
खादी फैशन की दुनिया में भी जले बिखेर रही है। विल्स फैशन वीक में खादी से बने कई नए परिधान दिखे। डिजाइनर कृति कुमार ने बताया कि महिलाओं की मांग पर उन्होंने खादी सिल्क की साड़ी बनाई। इसकी कीमत दस हजार रुपये तक है। मुंबई के फैशन डिजाइनर कंवलजीत ने बताया कि वह भी खादी से बने उत्पाद पेश कर चुके हैं। उधर, फेब इंडिया की स्टोर मैनेजर आरती कोहली ने बताया कि गांधी जयंती पर गांधी टोपी लांच की गई है।

इस बार बिक्री साढ़े सात करोड़ से बढ़कर दस करोड़ पर पहुंची है। राज्य सरकार समय से छूट दे तो इसे और बढ़ाया जा सकता है। राज्य के ऊनी वस्त्रों की मांग पश्चिम बंगाल तक रहती है।
-इंद्रासन यादव, सचिव, क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम, देहरादून

विचित्र ने की थी शुरुआत
देहरादून। कम ही लोग जानते हैं कि काशी में पहले गांधी आश्रम (खादी आश्रम) के संस्थापक सदस्यों में दून के विचित्र नारायण शर्मा भी शामिल थे। काशी विवि में 1920 में गांधी आश्रम शुरू हुआ। तब संस्थापकों में अलगूराम शास्त्री और लाल बहादुर शास्त्री जैसे दिग्गजों संग दून के नवादा में जन्मे शर्मा भी शामिल रहे। बाद में उनके प्रयासों से दून के टाउन हाल में 1927 में पहली खादी प्रदर्शनी लगी। इसी वर्ष दून के आश्रम का पंजीकरण हुआ और आचार्य कृपलानी को संचालक और शर्मा को प्रधान सचिव की जिम्मेदारी दी गई। आजादी के बाद इसका 15 जिलों में विस्तार किया गया। वर्ष 1978 में मुरादाबाद का विकेंद्रीकरण कर चार क्षेत्र बनाए गए। इसके बाद मुरादाबाद, बिजनौर, टिहरी, पौड़ी में भी केंद्र खुले। दून के धामावाला में स्थित केंद्र सबसे पुराना केंद्र बताया जाता है। 1998 में दून में विचित्र नारायण शर्मा का निधन हो गया। लेकिन, उनका बोया बीज आज राज्यभर में लोगों में खादी की अलख जगा रहा है।

एक घंटा चरखे संग श्रमदान
पलटन बाजार के खादी स्टोर के व्यवस्थापक परमानंद यादव ने बताया कि दो अक्तूबर (आज) को स्टोर में एक घंटे तक श्रमदान किया जाएगा। 11 से 12 बजे तक सभी स्टोर्स के कर्मचारी यहां चरखा कातेंगे। इससे तैयार खादी गरीबों को दान की जाएगी।

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