धर्मस्थल के आगे पशु अंग डालकर शहर का माहौल बिगाड़ने की करतूत

Dehradun Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
देहरादून। एक हरकत ने राजधानी की शांत फिजाओं में खलल डालने की कोशिश की। लोगों ने विरोध जताया। लेकिन, पुलिस और प्रशासन की लचर कार्यशैली ने मामले को सुलझाने की कोई कोशिश नहीं की। नतीजा दस घंटे तक हंगामा चला। हैरत यह रही कि पुलिस ने स्थिति संभालने की बजाय जनता पर दो बार लाठियां फटकार दीं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच चार घंटे तक हाईवे पर जाम रहने से दून और अन्य क्षेत्रों से यहां आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
शनिवार सुबह नौ बजे बंजारावाला स्थित एक धर्मस्थल के बाहर किसी पशु का अंग पड़े होने की सूचना पर कुछ संगठनों ने हंगामा शुरू कर दिया। थोड़ी देर में लोग हरिद्वार बाईपास पर पहुंचे और जाम लगा दिया। महिलाओं ने मानव शृंखला बनाकर चार घंटे तक वाहनों की आवाजाही ठप रखी। सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर तो पहुंचे लेकिन लोगों को शांत कराने को कोई कदम नहीं उठाया। नतीजा यह रहा कि दस घंटे तक मामला नहीं सुलझाया जा सका। इस दौरान पुलिस ने दो बार लाठीचार्ज कर प्रदर्शनकारियों को और भड़का दिया। लोगों ने भी पुलिस पर पत्थर फेंके। छीनाझपटी में कई पुलिसकर्मियों के बैज उखाड़ दिए गए। दूसरी ओर, तीन महिलाएं और दो युवक घायल हो गए। आखिर देर शाम पुलिस ने अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया। अब रविवार (आज) को मामले में बैठक बुलाई गई है।
नए डीजीपी भी फंसे जाम में
करीब साढ़े दस बजे जब कारगी चौक पर जाम लगाया गया था, नए डीजीपी सत्यव्रत बंसल कार से वहां से गुजर रहे थे। उनकी कार भी जाम में फंस गई। पुलिस ने किसी तरह उनके लिए रास्ता बनवाया। इस दौरान डीजीपी ने कार से झांककर मामला समझने की कोशिश की।

इनसेट
चुनाव के बीच साजिश की आशंका
दून की शांत फिजा में जहर घोलने वाली इस घटना को अधिकतर लोग गहरी साजिश का हिस्सा मान रहे हैं। राजधानी में अब तक ऐसा कोई मामला नहीं हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनावी दौर में इस तरह की घटनाओं के जरिये लोगों की भावनाएं भड़काने के पीछे कोई खास मकसद पूरा करने की कोशिश की गई। अच्छी बात यह रही कि लोगों ने घटना पर विरोध जताया लेकिन किसी तरह से स्थिति को बेकाबू नहीं होने दिया।
ऐसी स्थिति में लोगों ने शांति और सूझबूझ का परिचय दिया। जिससे साजिश करने वालों के इरादे पूरे नहीं हो पाए। आज तक यहां पर ऐसी स्थिति कभी नहीं बनी। आगे भी लोगों की समझदारी से ऐसे मामलों को तूल नहीं दिया जाएगा, ऐसा विश्वास है।
-गोविंद जोशी, सामाजिक कार्यकर्ता
मैं पूरे समय मौके पर था। पुलिस अधिकारी समझदारी दिखाते तो यह नौबत नहीं आती। लोगाें को बुरा लगा तो उन्होंने अपना विरोध जताया। पुलिस को लाठी नहीं चलानी चाहिए थी। पूरे घटनाक्रम को देखते हुए तो यही लगता है कि यह किसी की साजिश है।
-उमेश अग्रवाल, भाजपा नेता

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