आबादी एक लाख, फायर स्टेशन नहीं

Dehradun Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
त्यूनी/चकराता। प्रदेश की राजधानी से सटे और 385 वर्ग मील में फैले जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में अब तक एक फायर स्टेशन तक स्थापित नहीं हो सका है। वर्ष 2005 में त्यूनी बाजार में हुए भीषण अग्निकांड के बाद तैनात फायर बिग्रेड की एक गाड़ी तैनात की गई थी, मगर चार साल की सेवा के बाद उसे भी अचानक हटा दिया गया। फायर सर्विस नहीं होने से क्षेत्र की एक लाख आबादी पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। कई बार आगजनी की बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। मगर, शासन-प्रशासन को इसकी परवाह नहीं है।
जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में कालसी, चकराता और त्यूनी तीन तहसीलें आती हैं। लेकिन, इन तहसीलों में सरकार आज तक एक फायर स्टेशन स्थापित नहीं कर पाई। जनता पहले यूपी और अब उत्तराखंड सरकार से लगातार फायर स्टेशन स्थापित करने की मांग करती आ रही है। मगर, कोई सुनने वाला नहीं है। स्थिति यह है कि क्षेत्र में आगजनी की घटना होने पर डाकपत्थर स्थित फायर स्टेशन से अग्निशमन की गाड़ियां मंगवानी पड़ती हैं। लेकिन, घंटों का लंबा समय तय कर ये दमकल वाहन जब तक घटना स्थल तक पहुंचते हैं, तब तक सब कुछ तबाह हो चुका होता है। व्यापार मंडल त्यूनी के अध्यक्ष बॉबी चौहान का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से क्षेत्र में फायर ब्रिगेड होनी चाहिए। अब तक हुए अग्निकांडों में व्यापारी वर्ग को ही ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा है। लेकिन, फायर बिग्रेड की तरफ से कोई मदद नहीं मिल पाई।

अब तक हुई आगजनी की घटनाएं
वर्ष 2005 - त्यूनी बाजार में भीषण अग्निकांड में 250 दुकानें जलीं
वर्ष 2008 - सावड़ा बाजार में सात दुकानें जलीं
वर्ष 2009 - कथियान बाजार में भीषण अग्निकांड से 10 दुकानेें जलीं
वर्ष 2010 - में त्यूनी बाजार में भीषण अग्निकांड से 33 दुकानें जलीं

क्षेत्र फायर स्टेशन डाकपत्थर से दूरी
त्यूनी 122
चकराता 52
साहिया 32
नागथात 35
लाखामंडल 75

मैने क्षेत्र में अपने पूर्व के कार्यकाल के दौरान फायर स्टेशन स्थापित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। अब इसमें क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी जुटाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
-एसएस बर्निया, एसडीएम

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने त्यूनी में एक फायर ब्रिगेड की गाड़ी तैनात की थी, जिसे भाजपा सरकार ने हटा दिया। चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद जिलाधिकारी से वार्ता कर क्षेत्र में फायर ब्रिगेड तैनात कराई जाएगी।
- प्रीतम सिंह क्षेत्रीय विधायक/कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार।

राज्य गठन के बाद भी दुर्गम जनजातीय क्षेत्र में फायर स्टेशन का न खुलना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे लोगों की जान पर हमेशा जोखिम बना रहता है। इतने बड़े क्षेत्र में अग्निशमन वाहनाें की व्यवस्था नहीं होना क्षेत्र की हो रही उपेक्षा को दर्शाता है।
- टीकाराम शाह, सामाजिक कार्यकर्ता।

आगजनी की कोई भी घटना होने पर फायर ब्रिगेड दूसरे दिन ही पहुुंचती है। क्षेत्र के लोग सरकारी उपेक्षा से निराश हैं। यहां तैनात एकमात्र अग्निशमन वाहन हटाना भी दुर्भाग्यपूर्ण है।
- हरमोहन आनंद, क्षेत्रवासी

फायर स्टेशन स्थापित होने की मांग लंबे समय से उठ रही है, लेकिन शासन-प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। लोगों की जान की परवाह किसी को नहीं।
- दयाराम जैन

आगजनी की घटना होने पर क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में, सरकार को स्वयं इसका संज्ञान लेना चाहिए।
- इंदर सिंह नेगी, क्षेत्रवासी।

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