‘बड़ों’ की लड़ाई में ‘छोटों’ का कैरियर दांव पर

Dehradun Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
देहरादून। राज्य की क्रिकेट एसोसिएशनों की हठधर्मिता जूनियर खिलाड़ियों पर भारी पड़ रही है। इन खिलाड़ियों को काफी उम्मीद थी कि इस बार कोई न कोई हल निकल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिस तरह सभी पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए हैं, उससे उन्हें अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। तय है कि अगर जल्द ही राज्य में क्रिकेट की स्थिति साफ नहीं हुई तो इन उभरते खिलाड़ियों का भविष्य खराब हो जाएगा। इनमें से कई तो इस समय सब जूनियर स्तर पर क्रिकेट खेल रहे हैं।
कितने ही अभिभावक और उदीयमान क्रिकेटर इस उम्मीद में बैठे हैं कि राज्य को बीसीसीआई की संबद्धता मिले और उनके बच्चे भी बीसीसीआई के टूर्नामेंटों में खेलें। लेकिन सबंद्धता को लेकर हो रही देरी से उनके ओवर एज होने का खतरा है। अभिमन्यू क्रिकेट एकेडमी के आर्यन जुयाल को ही लें। वह पिछले साल अंडर-14 में उत्तर प्रदेश की तरफ से खेले लेकिन इस बार उन्हें डर है कि अगर उत्तर प्रदेश से उनको मौका नहीं मिला तो उनका साल खराब हो जाएगा। अभिमन्यू क्रिकेट एकेडमी में उनके साथी अन्य क्रिकेटरों को भी यही चिंता सता रही है।
अभी हमारी उम्र है। हम क्रिकेट में काफी कुछ कर सकते हैं, लेकिन राज्य में एसोसिएशन नहीं होने से देहरादून में ही खेल रहे हैं। इससे हमारा भविष्य ही बिगड़ रहा है---समर्थ सक्सेना, कक्षा आठ
सोचा था कि राज्य में जल्द ही क्रिकेट शुरू हो जाएगा। जूनियर स्तर से ही बीसीसीआई के टूर्नामेंटों में खेलने का अवसर मिलेगा। फिलहाल उम्मीद पूरी होती नहीं दिख रही है। बड़ों को मतभेद भुलाकर नई पीढ़ी के बारे में सोचना चाहिए। --पुलकित सिंह, कक्षा आठ
पिछले साल मैं उत्तर प्रदेश से खेला लेकिन दूसरे प्रदेश से बार-बार टीम में जगह बनाना मुश्किल है। अगर इस बार यहां एसोसिएशन होती तो यह मेरे जैसे खिलाड़ियों के लिए अधिक संभावना रहती। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस अहम मसले पर सबने चुप्पी साध रखी है।
आर्यन जुयाल, कक्षा सात
कब से उम्मीद है कि यहां भी क्रिकेट ठीक ढंग से शुरू हो सके। विवाद के बारे में हमें नहीं पता लेकिन जो सीनियर्स हैं उनको हमारे बारे में भी सोचना चाहिए। बीसीसीआई को भी आगे आना चाहिए।
-चेतन अग्रवाल, कक्षा आठ

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