‘एनजीओ ने करवाया गुलदार का शिकार’

Dehradun Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
देहरादून। गुलदार की खाल के साथ शुक्रवार को पकड़े गए युवकों ने सनसनीखेज खुलासा किया है। युवकों ने वन्यजीव संरक्षण के नाम पर राज्य में काम करने वाली दो एनजीओ डब्ल्यूपीएसआई और इफेक्ट पर ही शिकार करवाने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक संस्था के प्रतिनिधि ने खुद के सरकारी संस्था होने का झांसा दिया था। गुलदार की खाल बेचने में कोई दिक्कत न होने और बड़ी राशि मिलने का लालच भी दिया गया था। लेकिन, सौदा तय होते ही उन्हें खाल समेत पकड़वा दिया गया।
शुक्रवार को एसटीएफ और राजाजी पार्क की एसओजी ने डब्ल्यूपीएसआई और इफेक्ट की मदद से मोतीचूर में आठ युवकों को गिरफ्तार कर लिया था। उनके पास से एक वर्ष पूर्व मारे गए गुलदार की खाल, एक कार, मोटरसाइकिल और आठ मोबाइल बरामद किए गए थे। पूछताछ में युवकों ने बताया कि एनजीओ प्रतिनिधियों ने उनसे डेढ़ वर्ष पूर्व संपर्क किया था। उन्होंने खुद को सरकारी संस्था का प्रतिनिधि बताते हुए गुलदार की खाल की मांग की थी। कहा गया कि खाल खरीदने के लिए उनके पास लाइसेंस है। लंबे समय तक युवकों से खाल की मांग पर एक वर्ष पूर्व गुलदार का शिकार किया गया। खाल को अच्छी तरह सुखाने के बाद दस लाख रुपये में सौदा तय हुआ। शुक्रवार को उन्हें खाल देने मोतीचूर बुलाया गया, लेकिन यहां आते ही गिरफ्तार करवा दिया गया।
उधर, विभागीय सूत्राें के मुताबिक मामले में पकड़े गए आठों युवकों का कोई पिछला आपराधिक रिकार्ड नहीं रहा है। अगर युवकों के कहे अनुसार एनजीओ ने वाकई उन्हें झांसा देकर गुलदार का शिकार कराया तो यह एनजीओ का दोहरा अपराध है। एक तो अपने नंबर बढ़ाने की कोशिश में वन्यजीव का कृत्रिम शिकार और युवकों को प्रलोभन देकर अपराध में धकेलना।

कई एनजीओ की कार्यशैली संदिग्ध है। इनका सूचना तंत्र इतना मजबूत है तो शिकार से पहले या शिकार के वक्त ही शिकारियों को क्यों नहीं पकड़वाते। ऐसी संस्थाओं की जांच कर प्रतिबंध लगना चाहिए।
-अनिल बलूनी, पूर्व उपाध्यक्ष वन एवं पर्यावरण सलाहकार परिषद

यह मामला मेरे भी संज्ञान में आया है कि युवकों से प्रलोभन के जरिये गुलदार का शिकार कराया गया है। यह बेहद गंभीर मामला है। इसकी जांच करेंगे। ऐसी कार्यशैली पर सख्ती से अंकुश लगाया जाएगा।
-एसएस शर्मा प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव / मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक

गुलदार का शिकार कराने में डब्ल्यूपीएसआई का कोई हाथ नहीं है। हमने तो इफेक्ट संस्था की मदद से इस मामले का खुलासा किया था। आरोपियों को पकड़वाने में एसओजी और एसटीएफ की मदद की गई।
-राजेंद्र अग्रवाल, स्टेट हेड डब्ल्यूपीएसआई

हमारी संस्था का दायरा तो बेहद सीमित है। हमने सिर्फ डब्ल्यूपीएसआई से मिली सूचना के आधार पर काम किया है। गुलदार के शिकार मामले में हमारी संस्था का कोई हाथ नहीं है।
-डा. अभिषेक कुमार सिंह, इफेक्ट

शिकार करने वाला भी पकड़ा गया
देहरादून। गुलदार का शिकार करने वाले अनिल भंडारी को बुधवार को लैंसडौन वन प्रभाग की टीम ने पकड़ लिया। भंडारी ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से गुलदार को गोली मारी थी। देर रात तक राजाजी पार्क की एसओजी टीम भंडारी से पूछताछ करती रही।

आठों आरोपियों को जेल
देहरादून। गुलदार की खाल के साथ गिरफ्तार आठों आरोपियों को सीजेएम कोर्ट ने जेल भेज दिया। अगली सुनवाई सात सितंबर को होगी। शनिवार को सूरज भंडारी निवासी तेलीबाड़ा, सुनील नेगी निवासी महाबगढ़, अनिल बिष्ट निवासी तिमल्याणी, राकेश पंत निवासी थराली, घनश्याम सिंह व मनोज वर्मा निवासी ऋषिकेश, परमिंदर सिंह निवासी सहारनपुर और विनोद नेगी निवासी तेलीबाड़ा को सीजेएम सयन सिंह रावत की कोर्ट मेें पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर सभी को जेल भेज दिया गया।

Spotlight

Most Read

Kanpur

बाइकवालाें काे भी देना हाेगा टोल टैक्स, सरकार वसूलेगी 285 रुपये

अगर अाप बाइक पर बैठकर आगरा - लखनऊ एक्सप्रेस वे पर फर्राटा भरने की साेच रहे हैं ताे सरकार ने अापकी जेब काे भारी चपत लगाने की तैयारी कर ली है। आगरा - लखनऊ एक्सप्रेस वे पर चलने के लिए सभी वाहनों को टोल टैक्स अदा करना होगा।

17 जनवरी 2018

Related Videos

GST काउंसिल की 25वीं मीटिंग, देखिए ये चीजें हुईं सस्ती

गुरुवार को दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की 25वीं बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस मीटिंग में आम जनता के लिए जीएसटी को और भी ज्यादा सरल करने के मुद्दे पर बात हुई।

18 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper