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रातभर सहमे रहे तटीय इलाकों के लोग

Dehradun Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
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ऋषिकेश। टिहरी बांध से 300 क्यूमेक्स अतिरिक्त पानी छोड़े जाने पर भी गंगा के प्रवाह वार्निंग लेवल से नीचे ही रहा। जलस्तर में दूसरे दिन दशमलव पंाच-दस मीटर की घटत बढ़त दर्ज की गई। उधर, गंगा के उफान पर आने की संभावना के चलते तटीय इलाकों में बसे लोगों ने बीते बृहस्पतिवार की पूरी रात दहशत में ही काटी।
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बीते बृहस्पतिवार को टिहरी बांध को गंगा में 300 क्यूमेक्स अतिरिक्त पानी छोड़ा गया। जिसके बाद प्रशासन द्वारा तीर्थनगरी के तटीय इलाकों में पूर्वाह्न में अलर्ट जारी कर दिया गया। साथ ही बाढ़ नियंत्रण चौकियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए थे। मगर, दूसरे दिन भी बांध के अतिरिक्त पानी का गंगा के जलस्तर असर नहीं दिखा। जलस्तर में शुक्रवार को भी दिनभर वार्निंग लेवल के नीचे ही 0.05 से 0.12 मीटर तक की घटत- बढ़त बनी रही।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, सुबह गंगा का जलस्तर 338.90 मीटर रहा जो शाम को थोड़ा बढ़कर 339.00 मीटर तक जा पहुंचा। जो कि चेतावनी से आधा मीटर नीचे है। बताया कि फिलहाल जलस्तर में हल्की वृद्धि शुरू हुई है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि न होने पर माना जा रहा है कि देवप्रयाग से ऊपर अलकनंदा के प्रवाह में कमी आने से गंगा का प्रवाह पर खास असर नहीं दिख रहा है।
उधर, बीते रोज अलर्ट जारी होने के बाद चंद्रेश्वरनगर, मायाकुंड, शीशमझाड़ी आदि तटीय क्षेत्रों में लोग रातभर दहशत में रहे। उनकी निगाहें गंगा के बहाव पर ही टिकी रही। प्रशासन की ओर से भी बाढ़ नियंत्रण चौकियों के माध्यम से गंगा के प्रवाह पर नजर रखी गई।

बैराज में फ्लशिंग से चीला में उत्पादन थमा
पांच घंटे तक शक्ति नहर में नहीं छोड़ा गया पानी
फ्लशिंग के दौरान नहर, जलाशय में की गई मेंटीनेंस
ऋषिकेश। बैराज जलाशय में फ्लशिंग के कारण चीला पावर हाउस में करीब पांच घंटे विद्युत उत्पादन ठप रहा। इस दौरान जलाशय और शक्ति नहर में मैंटीनेंस वर्क किया गया।
उत्तराखंड जल विद्युत निगम से मिली जानकारी के मुताबिक, बीते दिनों नहर में हैवी डिस्चार्ज और गंगा में सिल्ट की मात्रा बढ़ने पर शुक्रवार को फ्लशिंग ली गई। सुबह आठ से दुपहर एक बजे तक शक्ति नहर में वाटर डिस्चार्ज रोका गया। जिसके बाद जलाशय में सिल्ट, पेड़, झाड़ियाें और कबाड़ की साफ सफाई सहित मेंटीनेंस वर्क किया गया।
निगम के अधिशासी अभियंता इंदु मोहन करासी ने बताया कि, बीते दिनों नहर में हैवी डिस्चार्ज से चैनलों को नुकसान पहुंचा। साथ ही जलाशय में भी काफी कबाड़ जमा हो चुका था। जिसका असर वाटर डिस्चार्ज पर पड़ा। बताया कि दुपहर में पानी छोड़े जाने के बाद पावर हाउस में शाम तक जेनरेशन सामान्य हो चुका था।

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