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80 लाख में हुआ था ‘जादुई सिक्के’ का सौदा

Dehradun Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
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देहरादून। भूटान नरेश के जादुई सिक्के के नाम पर दो व्यापारियों को नकली सिक्का बेचने का सौदा 80 लाख रुपये में किया गया था। मामले में पुलिस ने दस ठगों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से दो लाख रुपये, नकली सिक्का, 11 मोबाइल और दो कारें बरामद की गई हैं। ठगी का मुख्य सूत्रधार फरार है।
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दून पुलिस और एसओजी को रविवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल में जादुई सिक्के के नाम पर ठगी की सूचना मिली थी। मामले में देर रात ही दस ठगों और सिक्का खरीदने आए दो व्यापारियों को हिरासत में लिया गया था। सोमवार को एसएसपी आवास में पत्रकार वार्ता में एसएसपी नीरू गर्ग ने बताया कि एंटीक व्यापारियों के बीच भूटान नरेश के जादुई सिक्के को लेकर काफी क्रेज है। इसे देखते हुए मुंबई निवासी एंटीक व्यापारी सिराज मैसी ने ठगी का जाल बुना। काम के सिलसिले में वह दून आता रहता था। ऐसे में उसने दून के कुछ युवकों को भी साजिश में जोड़ लिया। सबसे पहले ब्रिटिशकालीन एक तांबे का सिक्का खरीदा गया। इसके बाद इन लोगों ने फोन, ईमेल के जरिये लखनऊ, मुंबई में एंटीक व्यापारियों से संपर्क कर उक्त सिक्के को जादुई सिक्का बताकर बेचने की बात कही। बताया गया कि यह सिक्का उन्हें पिथौरागढ़ से मिला। इस दौरान ठगी में सहारनपुर, मथुरा, लखनऊ के भी कुछ युवक शामिल हो गए और शिकार की तलाश में जुट गए।
कुछ दिन पूर्व मुंबई के माडल टाउन अंधेरी वेस्ट निवासी एंटीक व्यापारी गुरुशरण सिंह चौहान और अब्बास रोड रुस्तमनगर लखनऊ निवासी परवेज हुसैन से उनका संपर्क हुआ। एसएसपी ने बताया कि ठगों ने दोनों को भरोसा दिलाया कि यह सिक्का असली है और इसे इंग्लैंड में करीब 21 सौ करोड़ में बेचा जा सकता है। दोनों व्यापारी झांसे में आ गए। अस्सी लाख में सौदा तय हुआ और रविवार को दोनों सिक्का खरीदने दून आ गए। राजपुर रोड स्थित एक होटल में ठग व्यापारियों को सिक्का दिखाने पहुंचे। लेकिन, व्यापारियों को कुछ शक हुआ। इस पर ठगों ने सिक्के से चावल खींचने का भरोसा दिलाते हुए अपने साथ चलने को कहा। व्यापारियों ने बतौर पेशगी ठगों को दो लाख रुपये भी दे दिए। लेकिन, उन लोगों के होटल से निकलने से पहले ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस के आते ही पूरी साजिश रचने वाला सिराज मैसी फरार हो गया।
मौके से पुलिस ने विवेक शर्मा निवासी मथुरा, मणिराजन, जयप्रकाश तिवारी निवासी दून इनक्लेव शिमला बाईपास देहरादून, रमेश निवासी चाव मंडी रुड़की, दिलीप सागर निवासी पारसीक महाराष्ट्र, दिनेश कुमार निवासी कावली गेट मवाना मेरठ, वैभव पुंडीर निवासी सहारनपुर, आलोक सैनी निवासी रुड़की, मनीष कुमार निवासी रुड़की और नवीन कुमार निवासी नगीना बिजनौर को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से 11 मोबाइल, नकली सिक्का, दो लाख रुपये और दो कारें भी जब्त कर ली गईं। बाद में हिरासत में लिए गए दोनों व्यापारियों को छोड़ दिया गया।

क्या है जादुई सिक्के की कहानी
जानकारी के मुताबिक सन 1616 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने तांबे और इरिडियम धातु के मिश्रण से कुछ सिक्के बनाए थे। इनकी खासियत यह थी कि इनके संपर्क में आने वाले विद्युत यंत्र बाधित हो जातेे थे। इसके अलावा ये चावल को भी अपनी ओर खींच लेते थे। ऐसे में इन्हें कार्बन पेपर में लपेटकर रखा जाता था। हिंदू मतानुसार इन सिक्कों में नौ ग्रहों की शक्ति थी। यही वजह है कि लोग इन्हें खरीदने को लेकर लालायित रहते हैं। बताया जाता है कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने ऐसा एक सिक्का तत्कालीन भूटान नरेश को बेचा था, जो बाद में गायब हो गया। आरोपियों ने नकली सिक्के को भूटान नरेश का गायब सिक्का बताकर बेचने की कोशिश की थी।

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