जेल से रिहा हुए आचार्य बालकृष्ण

Dehradun Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
देहरादून। फर्जी पासपोर्ट मामले में करीब एक महीना जेल में रहने के बाद आखिरकार शुक्रवार को आचार्य बालकृष्ण ने आजादी की सांस ली। जेल से रिहा होकर निकले आचार्य के स्वागत के लिए खुद बाबा रामदेव बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ पहुंचे। उन्होंने एक बार फिर कांग्रेस को चुनौती दी। बोले, कांग्रेस को आचार्य के जेल में बिताए एक-एक दिन का हिसाब देना होगा। न्याय के मंदिर में यह पहली जीत है। अब आखिरी जंग की तैयारी है। उधर, रिहाई पर आचार्य बालकृष्ण के चेहरे पर भी संतोष साफ दिखा। बिना लाग-लपेट कहा, ‘28 दिन जेल में रहने के बाद अब क्रांतिकारी हो गया हूं। जिन्होंने मुझे जेल में डाला, उनका धन्यवाद। अब भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन फांसी लगने तक जारी रहेगा।’ आचार्य बालकृष्ण की रिहाई पर समर्थकों ने करीब पौन घंटे तक जेल के बाहर जमकर आतिशबाजी की। साथ ही आचार्य और बाबा रामदेव पर जमकर पुष्पवर्षा की गई। इसके बाद दोनों बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ हरिद्वार रवाना हो गए।
करीब पौने छह बजे बाबा रामदेव जेल के मेन गेट पर पहुंचे। ठीक उसी वक्त आचार्य बालकृष्ण जेल से बाहर आए। करीब आते ही आचार्य ने आदर भाव से बाबा रामदेव के पैर छुए और उनसे आशीर्वाद लिया। बाबा ने भी भावविभोर होकर उन्हें गले लगा लिया और रिहाई पर बधाई दी। गेट से बाहर निकलते ही आचार्य बालकृष्ण ने वहां मौजूद समर्थकों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि देशवासियों के प्यार और समर्थन के कारण ही सरकार के न चाहते हुए भी वह जेल से बाहर हैं। जेल से शुरू हुई यह क्रांति अब उनके अंत तक जारी रहेगी। कहा कि आयुर्वेद से जन सेवा के साथ देशसेवा भी करनी है। बाबा के चलाए आंदोलन को हर हाल में आगे बढ़ाना है। दिग्विजय सिंह के बाबा पर आचार्य की हत्या की साजिश के आरोप के जवाब में उन्होंने कहा कि हम एक-दूसरे के पूरक हैं। बाबा ने भी कहा कि आचार्य के बाहर आने से आंदोलन और मजबूत हो गया है। अब जनता सच जान गई है।

सुरक्षा में निकाला बाबा और आचार्य को
आचार्य और बाबा रामदेव टाटा सफारी में बैठकर जेल से बाहर निकले। मुख्य द्वार के बाहर सुबह से जमा समर्थकों ने आतिशबाजी और पुष्पवर्षा से दोनों का स्वागत किया। जमकर ढोल नगाड़े बजाए। बाबा रामदेव को जेड सुरक्षा प्राप्त होने के चलते दोनों को कड़ी सुरक्षा में वहां से निकाला गया। इस दौरान पूर्व खेल मंत्री नारायण सिंह राणा भी आचार्य के स्वागत को पहुंचे।

पहली बार जेल आया भाई सोम
21 जुलाई को जेल गए आचार्य 28 दिन जेल में रहे मगर करीब एक किलोमीटर दूरी पर स्थित एक निजी संस्थान से बीबीए कर रहा उनका छोटा भाई सोम सुवेदी पहली बार जेल में उनके स्वागत को आया। वह दोपहर से ही भाई के रिहा होने का इंतजार कर रहा था। भाई की रिहाई को लेकर वह इतना उत्साहित था कि सारा वक्त जेल के गेट पर टकटकी लगाए इधर-उधर घूमता रहा। जेल से रिहाई का समय साढ़े पांच बजे तक ही है लेकिन आचार्य को बाहर आते-आते पौने छह बज गए थे।

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