वैभव सैनी हत्याकांड : डॉक्टर निकला वैभव का कातिल

Dehradun Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
देहरादून। रायपुर पुलिस ने चर्चित वैभव सैनी हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। हत्या के आरोप में शहर के नामी चिकित्सक को गिरफ्तार किया है। वह पूर्व में वैभव के मकान में बतौर किराएदार रह चुका है। पुलिस के अनुसार वैभव के डाक्टर की पत्नी से अवैध संबंध थे और वैभव डाक्टर को ब्लैकमेल करता था। इसी के चलते डॉक्टर ने उसे मौत के घाट उतार दिया। परिजनों ने डॉक्टर के आरोप को निराधार बताया है।
शुक्रवार को प्रेस वार्ता में एसएसपी नीरू गर्ग ने बताया कि सहस्त्रधारा रोड निवासी डा. अविनाश गहलौत (मूल निवासी बिजनौर) करीब डेढ़ वर्ष पूर्व वैभव के रक्षा विहार, रायपुर स्थित मकान में परिवार सहित किराए पर रहता था। इसी दौरान वैभव के डाक्टर की पत्नी से अवैध संबंध बन गए। भनक लगने पर डाक्टर ने वैभव से झगड़ा किया और उसे धमकी देकर मकान खाली कर दिया। बावजूद इसके डाक्टर की पत्नी और वैभव एक-दूसरे के संपर्क में रहने लगे। यही नहीं, वैभव डाक्टर को उसकी पत्नी की अश्लील तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी देकर रुपये ऐंठने लगा। परेशान होकर डाक्टर ने वैभव को मारने की ठान ली।
वैभव की कमजोरियों का फायदा उठाकर डाक्टर ने फर्जी सिम के जरिए उससे संपर्क साधा और कई महिलाओं से वैभव के संबंध बनवाए। रक्तदान और स्पर्म डोनेशन के नाम पर उसे हजारों रुपये दिए। लेकिन इस दौरान कभी भी डाक्टर वैभव के सामने नहीं आया। पांच जुलाई को डाक्टर ने वैभव को एक महिला से मिलाने के बहाने सहस्रधारा रोड पर बुलाया। साथ ही वैभव को किसी लैब से हाथ पर कैनुला लगवाकर आने को कहा, जिससे वह उसे पौरुष क्षमता बढ़ाने का इंजेक्शन लगा सके। डाक्टर के कहे अनुसार वैभव सहस्त्रधारा क्रासिंग में उसे मिला और उसे कार में ननूरखेड़ा की तरफ ले गया। डॉक्टर उस वक्त सरदार के वेश में था। जिससे वैभव उसे पहचान नहीं पाया। रास्ते में वैभव को डायजापाम(नींद की दवा) का ओवरडोज दिया गया, जिससे उसका ब्लड प्रेशर गिर गया। बेहोश होने पर डाक्टर ने उसे नुवान की डोज कैनुला(ड्रिप चढ़ाने वाली सुई) के जरिए दे दी। मौत होने पर शव को ननूरखेड़ा के पास सड़क किनारे फेंक दिया गया। मूल रूप से सहारनपुर का रहने वाला वैभव सैनी का परिवार कई सालों से यहां रह रहा था। जबकि वैभव गंगोह में पढ़ता था।


अमर उजाला ने लगातार जताई थी हत्या की आशंका
वैभव की हत्या को पुलिस शुरू से आत्महत्या मानकर चल रही थी लेकिन अमर उजाला ने मौके पर मौजूद साक्ष्यों और घटना की स्थिति को देखते हुए हत्या की आशंका जताई थी। अमर उजाला ने इस हत्या में स्पर्म डोनेशन, प्रेम संबंध, ब्लैकमेलिंग और एक डॉक्टर का हाथ होने की खबरें भी प्रमुखता से छापी थी। बाद में डीआईजी संजय गुंज्याल के आदेश के बाद रायपुर पुलिस ने वैभव सैनी मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज किया। हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को डीआईजी ने पांच हजार रुपये और एसएसपी ने ढाई हजार रुपये का ईनाम देने की घोषणा की है। वैभव के परिजनों ने भी ‘अमर उजाला’ की इस मुहिम की सराहना की।



एक कालगर्ल ने खोली मौत की गुत्थी
एसओ रायपुर राजीव रौथाण के अनुसार मोबाइल सर्विलांस और एक कॉलगर्ल ने मौत की गुत्थी सुलझाई। भले ही इस पूरे घटनाक्रम के दौरान आरोपी डॉक्टर ने 16 मोबाइल हैंडसेट और 16 फर्जी आईडी से लिए गए सिम इस्तेमाल किए, मगर वह एक गलती कर बैठा। उसने वैभव के पास एक बार जो कॉलगर्ल भेजी थी, उसे अपने असली नंबर से फोन कर बैठा। जबकि कॉलगर्ल के नंबर पर वैभव ने भी अपने नंबर से फोन किया। डॉक्टर और वैभव दोनों के फोन की पिछले छह माह की कॉल डिटेल में पुलिस को उस कॉलगर्ल का नंबर कॉमन मिला। पता लगाकर उससे पूछताछ की गई। तो कॉलगर्ल ने बताया कि एक डॉक्टर उसे रुपये देकर वैभव के पास जाने को कहता था। इससे ज्यादा वह कुछ नहीं जानती। उस नंबर की आईडी चेक की गई तो वह डॉक्टर अविनाश की निकली। पुलिस ने तुरंत डॉक्टर को हिरासत में लिया। पूछताछ में वह टूट गया और सारी कहानी बयां कर दी।

10 नंबर लगाए थे लिसनिंग पर
पुलिस ने इस हत्याकांड के खुलासे को 10 मोबाइल नंबर लिसनिंग पर लगाए थे । करीब 20 दिन तक लगातार उनके बीच होने वाली बातचीत सुनी गई। मगर कुछ हाथ नहीं लगा।

घर के लेटर बॉक्स में डलवाता था रुपये
फिल्म ‘विक्की डोनर’ की तरह वैभव सैनी भी स्पर्म डोनेशन करता था। यह जानकारी डाक्टर ने पुलिस को दी। हालांकि इस बात का खुलासा पुलिस की पूछताछ में उसकी एक प्रेमिका पहले ही कर चुकी थी। वैभव को जल्दी अमीर बनने की चाह थी। इसी के चलते वह रुपयोें की लिए स्पर्म डोनेट करने लगा। साथ ही रक्तदान भी करने लगा। पुलिस के अनुसार हर बार स्पर्म डोनेशन पर उसे तीन हजार रुपये दिए जाते थे, जो डॉक्टर उसके घर के लेटर बॉक्स में रखवा देता था।

ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया
डाक्टर के अनुसार वैभव उसकी पत्नी की अश्लील तस्वीरों को सार्वजनिक करने की धमकी देकर उससे उगाही करता था। वह उससे दस-दस हजार रुपये करके दो बार रुपये ले चुका था। बाद में पचास हजार रुपये एकमुश्त लिए। इसके बाद भी वह पैसे के लिए उसे ब्लैकमेल करता रहा।

यूनीनॉर सिम डीलर के खिलाफ मुकदमा
इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए डाक्टर ने फर्जी आईडी पर यूनीनॉर कंपनी के दो सिम खरीदे। पुलिस ने इस मामले में सिम डीलर को भी आरोपी बनाया है। पुलिस ने जीएमएस रोड पर स्थित रिटेलर मोबाइल सेल प्वाइंट और बल्लूपुर रोड पर स्थित सार्थक टेलीकॉम के मालिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इन्हीं से लिए गए सिम कार्ड के जरिये डाक्टर ने डॉ. राकेश के रूप में वैभव से लगातार संपर्क बनाए रखा।

एमडी में टॉपर था अविनाश
डॉक्टर अविनाश ने एमबीबीएस के बाद एमडी किया। जिसमें वह टॉपर रहा। 06 जनवरी 2002 में पीजी कोर्स के लिए आयोजित एम्स की प्रवेश परीक्षा में भी डॉक्टर अविनाश टॉपर रहा। वह एक बेहतरीन डॉक्टर थे।

‘17-18 अगस्त को नहीं मिलेंगे डॉक्टर अविनाश’
शुक्रवार को डॉक्टर अविनाश को गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन उनका लाडपुर स्थित ओजस्वी क्लीनिक आज भी रोज की तरह खुला रहा। हालांकि बाहर एक नोटिस जरूर लगा था कि डॉक्टर 17 और 18 अगस्त को नहीं मिल पाएंगे। डॉक्टर के पकड़े जाने की जानकारी उनके क्लीनिक में काम करने वाले लोगों को नहीं थी।

कोई और भी है शामिल
वैभव सैनी की हत्या के पीछे की वजह से परिजन संतुष्ट नहीं हैं। उनके अनुसार कातिल डॉक्टर अविनाश ही है। मगर अवैध संबंध और ब्लैकमेलिंग के आरोप गलत हैं। उनके चाचा के अनुसार इस हत्याकांड में कुछ और लोग शामिल हो सकते हैं। पुलिस आरेापी को रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ करे।

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