आचार्य और प्राचार्य की न्यायिक अभिरक्षा बढ़ी

Dehradun Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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देहरादून। फर्जी पासपोर्ट मामले में गिरफ्तार आचार्य बालकृष्ण और प्राचार्य नरेश चंद्र द्विवेदी को सोमवार विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) प्रीतू शर्मा की कोर्ट में पेश किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा 14 दिन के लिए बढ़ा दी गई।
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बालकृष्ण के वकील प्रवीण सेठ ने कोर्ट को अवगत कराया कि गिरफ्तारी के इतने दिनों बाद भी सीबीआई ने सीआरपीसी-207 के अंतर्गत बचाव पक्ष को सीबीआई रिपोर्ट, एफआईआर, 161 के बयान और अन्य दस्तावेजों की नकल नहीं उपलब्ध कराई है। इस पर सीबीआई के वकील दीप नारायण ने कोर्ट के आदेश पर बालकृष्ण और नरेश चंद्र के प्रतिनिधियों को संबंधित नकल उपलब्ध करा दी। बाद में प्रवीण सेठ ने बालकृष्ण के मोबाइल रिलीज करने के संबंध में पूर्व में दाखिल अर्जी का निस्तारण करने का कोर्ट से आग्रह किया। इस पर सीबीआई का कहना था कि चूंकि बालकृष्ण का मोबाइल केस प्रापर्टी नहीं है। इसलिए मोबाइल रिलीज करने पर सीबीआई को कोई आपत्ति नहीं है। मोबाइल रिलीज के संबंध में फिलहाल कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है।
हजारों पेजों की नकल
क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की धारा 207 के अनुसार जिस दिन भी न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में मुकदमे की कार्यवाही शुरू हो जाती है। कोर्ट के आदेश पर अभियुक्त/बचाव पक्ष को रिपोर्ट, एफआईआर की कॉपी, 161 और 164 सीआरपीसी के बयान एवं अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। सोमवार को सीबीआई ने दोनों पक्षों को हजारों पेजों की नकल उपलब्ध कराई। सीबीआई जांच के हजारों पन्नों का पुलिंदा देखकर कोर्ट मेें मौजूद लोग दंग रह गए।

16 को होगी जमानत अर्जी पर सुनवाई
बृहस्पतिवार को नरेश चंद्र की जमानत अर्जी सत्र न्यायालय में पेश होनी है। इससे पहले बीते सोमवार को नरेश चंद्र ने सीबीआई कोर्ट में गुपचुप तरीके से वकील की पोशाक पहनकर सरेंडर किया था, जिसकी जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी थी। अब 16 अगस्त को सत्र न्यायालय में जमानत अर्जी पर सुनवाई होगी।

अलग-अलग वाहनों में कोर्ट पहुंचे दोनोें आरोपी
सोमवार की सुबह साढ़े ग्यारह बजे पुलिस के वाहन में बालकृष्ण को कोर्ट लाया गया, जबकि नरेश चंद्र आम कैदियों की तरह हवालात ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में कोर्ट पहुंचे। सुनवाई के तुरंत बाद बालकृष्ण को पुलिस के वाहन में जेल भेज दिया गया। वहीं नरेश चंद्र को हवालात में रखा गया और शाम को अन्य कैदियों के साथ जेल भेजा गया।


बोले बालकृष्ण
राष्ट्रभक्त को जेल भेजने से ज्यादा सीबीआई क्या कर सकती है। मुझे राष्ट्रभक्ति की सजा मिल रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी मुहिम को दबाने के लिए केंद्र सरकार यह सब साजिश कर रही है।
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