बाल आयोग करेगा कमल की मदद

Dehradun Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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देहरादून। सरकारी स्तर पर मदद मिलने के बावजूद हल्द्वानी में 12 वर्षीय बालक का आपरेशन न कराए जाने के मामले में बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सख्त रवैया अपना लिया है। मामले में बच्चे की मां पर तो कार्रवाई करने की तैयारी है ही, जिले की समाज कल्याण अधिकारी को भी तलब किया गया है।
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हल्द्वानी निवासी कमल बिष्ट को ब्रेन हैमरेज हो गया था। मुख्यमंत्री राहत कोष से मिली मदद से दो बार उसका आपरेशन हो चुका है। लेकिन, उसकी आंखों की रोशनी जा चुकी है। अब कमल का एक और आपरेशन किया जाना है। इसके लिए जिलाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से एक लाख रुपये जुटा भी लिए गए थे। यह राशि कमल की मां के एकाउंट में डाल दी गई। लेकिन, कमल की मां ने आपरेशन की बजाय कुछ रुपये अपने खर्चों के लिए निकाल लिए। सामाजिक संस्थाओं ने आपत्ति जताते हुए राशि अस्पताल के खाते में डालने की कोशिश पर उसने लोगों पर आरोप लगाना शुरू कर दिया। यही नहीं, वह बच्चे का आपरेशन न कराने पर अड़ गई। हालांकि, बाद में उसने पैसे लौटा दिए। लेकिन, बच्चे का आपरेशन अब लटक गया है।
मामले में अब बाल अधिकार संरक्षण आयोग आगे आया है।
मुझे मिली जानकारी के मुताबिक कमल के अभिभावक बार-बार मदद की राशि हड़प रहे हैं। जुबिनाइल जस्टिस एक्ट के अनुसार कोई भी व्यक्ति, जो बच्चों का अहित करे उस पर कार्रवाई की जा सकती है। इस आधार पर हम बच्चे के अभिभावकों पर जरूरी कार्रवाई कर सकते हैं। संबंधित समाज कल्याण अधिकारी की लापरवाही भी सामने आई है। उनसे पूछा गया, तो उन्होंने ऐसे मामले का संज्ञान ही न होने की बात कही। अब उनसे मामले में जवाब मांगा गया है। जहां तक कमल का प्रश्न है, उसे हरसंभव मदद दिलाई जाएगी। डीएम निधिमणि त्रिपाठी मामले को देख रहे हैं। मैं खुद उनसे लगाता संपर्क में हूं।
-अजय सेतिया, अध्यक्ष बाल अधिकार संरक्षण आयोग

सरकार भी लापरवाह
केंद्र सरकार की ओर से देशभर में इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन स्कीम चलाई जा रही है। राज्यों में यह कार्य समाज कल्याण विभाग देखता है। इसके तहत हर जिले में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी भी गठित हैं। लेकिन, उत्तराखंड में इसे लेकर गंभीरता का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि केंद्र से इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन के लिए एमओयू करने वाला सबसे अंतिम राज्य उत्तराखंड ही रहा। हैरत की बात यह है कि यह एमओयू भी केंद्र की ओर से कई बार चेताने के बाद किया गया।

आयोग देगा ट्रेनिंग
आयोग के अध्यक्ष अजय सेतिया खुद इस बात पर चिंता जताते हैं कि राज्य में समाज कल्याण अधिकारियों को न तो बाल संरक्षण को लेकर अपनी जिम्मेदारी मालूम है, न ही चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अध्यक्ष और सदस्यों को कोई जानकारी है। उन्होंने बताया कि इस स्थिति से निपटने के लिए अब आयोग कमेटियों को प्रशिक्षित करेगा। सितंबर से हर दो जिलों में एक ट्रेनिंग कैंप लगाया जाएगा। इसमें कमेटी सदस्यों को जुबिनाइल एक्ट और बाल संरक्षण से जुड़ी जानकारियां दी जाएंगी।
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