देवदार की छाल करेगी मालामाल

Dehradun Updated Sat, 11 Aug 2012 12:00 PM IST
देहरादून। बेहतरीन लकड़ी देकर देवदार का पेड़ पहले ही उत्तराखंड वन विकास निगम की आर्थिकी का अच्छा जरिया रहा है। लेकिन, अब तक अनुपयोगी समझी जाने वाली देवदार की छाल भी निगम को मालामाल करने वाली है। उत्तराखंड में देवदार बहुतायत में मिलता है। हर साल करीब एक हजार कुंतल देवदार की छाल बेकार रह जाती है। केरल औषधि बोर्ड ने वन विकास निगम से यह छाल उपलब्ध कराने की मांग की है। बताया गया कि इस छाल से विभिन्न दवाओं के निर्माण में प्रयोग होने वाला तेल निकाला जाएगा। इसके बाद वन विकास निगम ने जरूरी परीक्षणों के बाद केरल औषधि बोर्ड के समक्ष खुद ही तेल निकालकर बेचने का प्रस्ताव रख दिया है। इस तेल की कीमत चार सौ से पांच सौ रुपये प्रति किलोग्राम तक है। यानी, इससे निगम को हर साल करोड़ों रुपये की आय होगी।

केरल औषधि बोर्ड का प्रस्ताव मिला है। हम तेल की ही आपूर्ति करने पर विचार कर रहे हैं। इससे निगम और बोर्ड दोनों को लाभ होगा। केरल तक छाल ले जाने का परिवहन खर्च बचेगा। लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
-श्रीकांत चंदोला, प्रबंध निदेशक उत्तराखंड वन विकास निगम

यह है उपयोग
देवदार का तेल बाम, कई तरह की दर्द निवारक दवाएं आदि के निर्माण में उपयोग किया जाता है।

- मूल खबर -

देवदार के पेड़ के छिलके से होगी प्रदेश को कमाई
-उत्तराखंड के स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। देवदार के पेड़ के जिस छिलके को जंगलों में फेंक दिया जाता था। उससे एक पाई की स्थानीय लोगों से लेकर सरकार तक को कमाई नहीं होती थी। उस छिलके से न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा बल्कि उत्तराखंड वन विकास निगम और सरकार को खूब कमाई होगी। इसको लेकर उत्तराखंड वन विकास निगम की ओर से एक्सरसाइज की जा रही है।
उत्तराखंड के जंगलों में हर साल कई हजार देवदार के सूख पेड़ कटते हैं। इन पेड़ों की कटाई उत्तराखंड वन निगम द्वारा किया जाता है। पेड़ काटने के बाद छिलके जंगल में ही छोड़ दिया जाता था। इसी छिलके की मांग केरल औषधि बोर्ड ने उत्तराखंड वन विकास निगम से की है। छिलके की मांग तेल निकालने के लिए किया गया। देवदार के छिलके से भी तेल निकलता है। इस मांग के बाद निगम की ओर से पड़ताल शुरू की गई। केरल औषधि बोर्ड के सामने यह प्रस्ताव रखा है कि छिलके के बजाय निगम तेल ही उपलब्ध करा देगा। इस तेल की कीमत प्रति किलोग्राम 400 से 500 रुपये मिलेगा। एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश से एक हजार कुंतल देवदार के छिलके हर साल निकलते हैं। उत्तराखंड वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्रीकांत चंदोला का कहना है कि केरल औषधि बोर्ड के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इससे निगम को कई करोड़ की कमाई केवल छिलके से एक साल में हो जाएगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी सृजन हो जाएगा। बोर्ड को छिलके के बजाय तेल की ही आपूर्ति करने पर विचार किया जा रहा है। इससे निगम और बोर्ड दोनों को लाभ होगा। क्योंकि, केरल तक छिलके ले जाने का परिवहन खर्च बच जाएगा।

देवदार के तेल से क्या बनता है
देवदार के तेल से बाम, कई तरह की दर्द निवारण दवाईयां आदि के उत्पाद में इस्तेमाल किया जाता है। उत्तराखंड में देवदार के काफी पेड़ हैं, लेकिन अभी तक इसकी मांग किसी स्तर पर नहीं की जाती थी। इसके कारण ये छिलके बेकार हो जाते थे।

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