मंत्री के घर के सामने आठ चालान

Dehradun Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
देहरादून। आम आदमी पर ही चालान की मार पड़ने के ‘अमर उजाला’ खुलासे के बाद राजधानी पुलिस हरकत में आई है। बृहस्पतिवार को राजधानी के वीआईपी क्षेत्रों में यातायात सुधार अभियान चलाया गया। इस दौरान मंत्री दिनेश अग्रवाल के घर के सामने खड़े आठ वाहनों का चालान कर दिया गया।
मंगलवार को कैंट रोड निवासी एनआरआई प्रीतपाल सिंह के सड़क पर खड़े वाहन का चालान पुलिस ने काट दिया था। बिना मुहर लगे चस्पा चालान को भुगतने प्रीतपाल एक से लेकर दूसरे पुलिस अधिकारियों के चक्कर काटते रहे। पांच घंटे बाद भी समाधान नहीं हुआ तो हताश प्रीतपाल ने यहां तक कह दिया कि वह अपने बच्चों को कभी भारत नहीं भेजेंगे। पुलिस की कार्यशैली से क्षुब्ध इस एनआरआई की खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। बताया था कि मंत्रियों, सरकारी अधिकारियों के घरों, सचिवालय समेत बड़े सरकारी कार्यालयों के बाहर सड़कों पर नियमविरुद्ध पार्क किए जाने वाहनों पर पुलिस हाथ तक नहीं डालती। नौ अगस्त के अंक में भी अमर उजाला ने चालान पर वीआईपी चाल शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद हरकत में आई पुलिस ने वीआईपी क्षेत्रों में अभियान चलाया। रेसकोर्स स्थित मंत्री दिनेश अग्रवाल के घर के आगे खड़े आठ वाहनों के चालान किए गए। कई और इलाकों में पुलिस ने अभियान चलाया।

चालान में भी गलतियां
यातायात सुधार के नाम पर पुलिस कई बार अभियान चलाती है। इस दौरान वाहनों के चालान भी किए जाते हैं। लेकिन, पुलिसकर्मियों की लापरवाही और चालान में गलतियों की वजह से लोगों को दोगुनी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कभी चालान पर पुलिसकर्मी के हस्ताक्षर नहीं होते, तो कभी सक्षम अधिकारी की मुहर गायब रहती है। ऐसे में लोग पुलिस अफसरों के चक्कर काटते रह जाते हैं।

सिटी बसों, विक्रम वालों से ‘दोस्ती’
हैरत की बात यह है कि अभियान के दौरान हर बार दोपहिया वाहन चालकों पर ही फोकस रहता है। विक्रम और सिटी बसों को रोका तक नहीं जाता। जबकि राजधानी की यातायात व्यवस्था बिगाड़ने में इन दोनों को बड़ी वजह माना जाता है। लेकिन ओवरलोडिंग, गलत तरीके से वाहन चलाने या स्टापेज पर न रुकने जैसी गड़बड़ियों के बावजूद इनका चालान नहीं किया जाता। वरिष्ठ अधिकारी भी इस ‘दोस्ती’ से वाकिफ हैं। इसी पर संज्ञान लेते हुए कुछ दिन पूर्व एसपी ट्रैफिक अजय जोशी ने पुलिसकर्मियों को सिटी बसों, विक्रमों के चालान के निर्देश दिए थे।

अपनी सहूलियत का ध्यान
सूत्र बताते हैं कि पुलिस चालान काटने में भी अपनी सुविधा का ही ख्याल रखती है। शहर के कुछ खास चौराहों और सड़कों पर ही अभियान चलाया जाता है। इनके इतर अन्य चौराहों, मार्गों का क्या हाल है कोई देखता तक नहीं।
हूटर और बत्ती लगी गाड़ियाें से दूरी
राजधानी में हूटर और लाल या नीली बत्ती लगे वाहन चाहे यातायात नियमों की धज्जियां ही क्यों न उड़ा डालें, लेकिन पुलिसकर्मी उनसे दूरी बनाए रखते हैं। यह भी नहीं जांचा जाता कि हूटर या बत्ती क्यों लगाई गई है। यही नहीं, काले शीशे वाले वाहनों पर भी कार्रवाई नहीं की जाती। इसके लिए तय मानकों की जानकारी न होना वजह बताई जाती है।
नहीं मिलता कागज दिखाने का वक्त
कोई वाहन चालक बिना कागज के पकड़ा जाता है तो वाहन तुरंत सीज कर दिया जाता है। जबकि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत सीज करने से पहले कम से कम आधे घंटे का वक्त कागज दिखाने को दिया जाना चाहिए।
यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रत्येक वाहन का चालान नियमित रूप से होगा। चाहे वो वीआईपी हो या आम। प्रत्येक इलाके में चालानों की कार्रवाई होगी। थाना पुलिस से भी सहयोग लिया जाएगा।
-अजय जोशी, एसपी ट्रैफिक

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