वन्यजीवों के चार दुश्मन गुज्जर, सपेरे, कंजर और बावरिया

Dehradun Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
देहरादून। उत्तराखंड के बाघ, गुलदार, भालू सहित दूसरे वन्यजीवों के दुश्मन चार समुदाय बने हैं। ये समुदाय वन्यजीवों के मूवमेंट तलाशने से लेकर मारने और अंगों का मार्केटिंग करने तक का कार्य करते हैं। इस नेटवर्क को तोड़ पाने में अब तक वन विभाग सहित दूसरी एजेंसियां पूरी तरह नाकाम रही है।
पिछले एक दशक से गुज्जर, सपेरे, कंजर और बावरिया समुदाय के बीच जबर्दस्त नेटवर्क बना हुआ है। ये चारों समुदाय ही प्रदेश के वन्यजीवों के दुश्मन बने हुए है। बाघ के अंगों से लेकर सांप के जहर तक की तस्करी की जा रही है। सबसे अधिक गुलदार और बाघ इनकी चपेट में आ रहे हैं। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक में वन्यजीवों के अंगों की तस्करी की जा रही है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों इनके नेटवर्क को तोड़ पाने में नाकाम रही है। जबकि, वन्यजीवों के अंगों की तस्करी को रोकने के लिए लगभग एक दर्जन से अधिक एजेंसियां काम कर रही है। इसके बावजूद वन्यजीवों की तस्करी थम नहीं रही।
केस - 1 फरवरी 2012 में नजीमाबाद में एक बाघ और तीन गुलदार की खाल बरामद की गई थी। इसमें बावरिया, गुज्जर, सपेरे और कंजर सभी समुदाय के लोग पकड़े गए थे।
केस - 2 फरवरी 2011 में वन विभाग की ओर से बाघ शिकार के मामले में उक्त चारों समुदाय के लोगों को पकड़ा गया था, जिनके नेटवर्क हरियाणा तक से जुड़े थे।

किस समुदाय का क्या है काम
गुज्जर और सपेरा :

ये दो ऐसे सुमदाय है, जिन्हें बाघ, गुलदार सहित दूसरे वन्यजीवों के मूवमेंट का पता होता है। क्योंकि, ये दोनों ही समुदाय जंगल में रहते हैं। इनका संपर्क कंजर समुदाय से होता है। उनके बताने के आधार पर कंजर फंदा लगाते हैं।
कंजर : इस समुदाय के लोग फंदा लगाने से लेकर बाघ, गुलदार को मारने तक का काम करते हैं। कंजर लोग बेहद बारीकी से खाल निकालते हैं, जिससे खाल में किसी प्रकार का छेद में नहीं हो पाता। इसके बाद वन्यजीवों के मांस का सेवन भी कर लेते हैं।
बावरिया : वन्यजीवों के अंगों की मार्केटिंग बावरिया समुदाय के लोग करते हैं। ये अंगों को बेचने में एक्सपर्ट होते हैं। इन्हें पता होता है कि किस वन्यजीव के अंग को कहां पर बेचना है।
- (नोट: उक्त चारों समुदाय केवल उन्हीं लोगों के लिए है जो कि वन्यजीव अपराध से जुड़े हैं।)
अधिकारियों पर रहती है नजर
वन्यजीव अपराध से जुड़े शिकारियों की नजर प्रदेश के वन अधिकारियों पर रहती है। किस रेंज, डिवीजन में कौन सा अधिकारी तैनात है। कौन सख्त और कौन नरम है। कमजोर कड़ी की सूचना मिलते ही ये लोग अपने काम को अंजाम देते हैं।
--
वन्यजीव अपराध रोकने के लिए ये एजेंसियां कर रही काम
वन विभाग, एसटीएफ, पुलिस, सेंट्रल वाइल्ड लाइफ क्राइम ब्यूरो, डब्ल्यूपीएसआई, डब्ल्यूटीआई, उत्तराखंड एंटी पोचिंग सेल, वन विभाग का एसटीएफ
--
प्रदेश में वन्यजीव अपराध एक चिंता का विषय है। इस पर काबू पाने के लिए रणनीति बनाई जा रही है। पुलिस सहित दूसरी एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है। खासतौर पर नेटवर्क को तोड़ने पर फोकस किया जा रहा है।- एसएस शर्मा प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव

Spotlight

Most Read

Kanpur

बाइकवालाें काे भी देना हाेगा टोल टैक्स, सरकार वसूलेगी 285 रुपये

अगर अाप बाइक पर बैठकर आगरा - लखनऊ एक्सप्रेस वे पर फर्राटा भरने की साेच रहे हैं ताे सरकार ने अापकी जेब काे भारी चपत लगाने की तैयारी कर ली है। आगरा - लखनऊ एक्सप्रेस वे पर चलने के लिए सभी वाहनों को टोल टैक्स अदा करना होगा।

16 जनवरी 2018

Related Videos

सोशल मीडिया ने पहले ही खोल दिया था राज, 'भाभीजी' ही बनेंगी बॉस

बिग बॉस के 11वें सीजन की विजेता शिल्पा शिंदे बन चुकी हैं पर उनके विजेता बनने की खबरें पहले ही सामने आ गई थी। शो में हुई लाइव वोटिंग के पहले ही शिल्पा का नाम ट्रेंड करने लगा था।

15 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper