उत्तराखंड ग्रीन इंडिया मिशन का प्रस्ताव तैयार

Dehradun Updated Mon, 06 Aug 2012 12:00 PM IST
देहरादून। उत्तराखंड ग्रीन इंडिया मिशन का प्रस्ताव तैयार हो चुका है। लगभग आठ सौ करोड़ के बजट से प्रदेश को अगले सात साल में न केवल पूरा हरा भरा किया जाएगा, बल्कि घास के मैदान भी विकसित किए जाएंगे। राज्य में मिशन की शुरूआत 2013 से की जाएगी। इसके लिए बजट केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत किया जाएगा।
जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर भारत सरकार की ओर से ग्रीन इंडिया मिशन 2013 में लांच करने की तैयारी है। प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह खुद इसकी घोषणा कर चुके हैं। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों को अपने स्तर पर बजट तैयार करके केंद्र को भेजने के लिए कहा था। इसी के तहत उत्तराखंड में भी ग्रीन इंडिया मिशन का 800 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है। इसके तहत हर साल प्रदेश में दो करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। जड़ी बूटी के संवर्धन पर भी फोकस किया जाएगा। सिविल सोयम भूमि पर पौधरोपण करने पर अधिक जोर दिया जाएगा। घास के मैदान भी विकसित किए जाएंगे। यह योजना धरातल पर कितनी सफल हो पाती है, यह देखने वाली बात होगी। क्योंकि, हरियाली करने के लिए पहले बहुत सी योजनाएं चलाई गई, लेकिन ज्यादातर योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह गईं।
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उत्तराखंड में हरियाली बढ़ाने के इतनी योजनाएं
1 - सिविल सोयम एवं आरक्षित वनों की विकास योजना
2- 13वें वित्त आयोग के तहत वनों का अनुरक्षण
3- रोजगार परक प्रजातियों का रोपण
4- वन पंचायत सुदृढ़ीकरण योजना
5- क्षति पूरक पौधरोपण
6- मुख्यमंत्री हरित विकास योजना
7- मुख्यमंत्री जड़ी-बूटी विकास योजना
( इन योजनाओं के बावजूद प्रदेश में कई सालों से हरियाली नहीं बढ़ रही है। भारतीय वन सर्वे 2011 की रिपोर्ट में भी इसका खुलासा हो चुका है)

कोट:
ग्रीन इंडिया मिशन उत्तराखंड में हरियाली बढ़ाने मेें में एक पड़ाव साबित होगा। अधिक से अधिक बजट का आवंटन वन पंचायतों को किया जाएगा, जिससे जमीन पर काम हो सके। बजट की मंजूरी के लिए केंद्र को जल्द ही प्रस्ताव भेजा जाएगा।
-डा. आरबीएस रावत, प्रमुख वन संरक्षक

प्रस्ताव तो अच्छा है, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों की नीयत ठीक नहीं है। विभाग केवल कागजों पर ही पौधे लगाता है। वन विभाग को दो हजार करोड़ का भी बजट दे दिया जाए तो वह चट कर जाएगा।
- अवधेश कौशल, पर्यावरणविद

हरियाली करने के लिए पहले भी कई मिशन चलाए गए। इसमें बंबू मिशन भी शामिल है, लेकिन तमाम मिशन अब तक फेल रहे हैं। ऐसे में अगर पहले की खामियों से सीख नहीं ली गई तोे इसकी भी कामयाबी की बहुत उम्मीद नहीं की जा सकती। इसके लिए प्रदेश की पंचायतों को मिशन से जोड़ना जोड़ना होगा।
- अनिल जोशी, पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता
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प्रदेश के 20 रेंजों में शून्य हुआ पौधरोपण
हरियाली और पौधरोपण के नाम पर किस तरह खेल किया जाता है, यह देखने को मिला है विभाग की ही एक जांच में। विभाग की ओर से पूरे प्रदेश में 2007-08 से 2010-11 के बीच की गई जांच में 20 ऐसे रेंज या बीट रहे हैं, जहां की पौधरोपण शून्य हुआ है। केवल कागजों में हरियाली की गई है। इसे देखने वाला कोई नहीं है।

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