हार गई टीम इंडिया लेकिन कोहली ने लिया 'स्वीट सिक्सटीन' का मजा

टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 01 Apr 2016 06:44 PM IST
virat kohli not a chase master
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टीम इंडिया के लिए भले ही टी-20 वर्ल्ड कप से चुनौती खत्म हो गई है, लेकिन विराट कोहली ने जिस तरह से इस टूर्नामेंट में खेल दिखाया है उसकी धमक आगे लंबे समय तक बनी रहेगी।
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विंडीज के खिलाफ भी कोहली ने जोरदार पारी खेली, लेकिन उनकी पारी टीम की जीत के लिए लाभदायक साबित नहीं हुई। जबकि इससे पहले उन्होंने पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लक्ष्य का पीछा करते हुए अकेले अपने दम पर टीम इंडिया को जीत दिलाई थी, खासकर कंगारुओं के खिलाफ मुकाबले में।


फिलहाल उन्होंने मुंबई में हुए सेमीफाइनल मैच में 189.36 की स्ट्राइक रेट के साथ बल्लेबाजी की और 47 गेंदों में 89 रनों की नाबाद पारी खेली। वह टी-20 में ऐसे बल्लेबाज बन गए हैं जिन्होंने सबसे तेज स्ट्राइक रेट के साथ 40 से ज्यादा गेंदें खेली लेकिन वह एक से ज्यादा (एक या एक भी छक्का नहीं) नहीं जड़ सके। हालांकि इस पारी में उनके बल्ले से एक छक्के के साथ 11 चौके निकले थे। कोहली ने 47 गेंदों में 6 पर डॉट बॉल, 19 पर एक रन, 10 पर 2 रन बनाए।

अपनी इस पारी में एक समय वह 31 गेंदों में 44 रन बना कर खेल रहे थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने आतिशी बल्लेबाजी करते हुए अगली 16 गेंदों में 45 रन कूट लिए।

साथ ही यह टूर्नामेंट उनके लिए किसी स्वपन सरीखा जैसा रहा। विंडीज के खिलाफ अर्धशतक लगाते हुए वह टी-20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा फिफ्टी लगाने वाले बल्लेबाज भी बन गए। उन्होंने अपनी 16वीं फिफ्टी पूरी की। इसके लिए उन्होंने क्रिस गेल और ब्रैंडन मैकुलम को पीछे छोड़ा। दोनों ने 15-15 बार 50 से ज्यादा की पारी खेली है। दोनों ने ही अपने टी-20 अंतरराष्ट्रीय करियर में 13 अर्धशतक के अलावा 2 शतक लगाए हैं।

वर्ल्ड कप से विदाई से पहले कोहली ने अपने टी-20 करियर में 40 पारियों में 1641 रन जोड़ लिए हैं।

तो विराट कोहली ने दिखा दिया नहीं हैं सिर्फ 'चेस मास्टर'

विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 89 रनों की नाबाद पारी खेलकर साबित कर दिया वह लक्ष्य का पीछा करने में नहीं बल्कि लक्ष्य देने के लिए बड़ पारी खेलने में सक्षम हैं।

कौन कहता है विराट कोहली टी-20 क्रिकेट के सिर्फ चेस मास्टर हैं। आखिर ऐसा सोचने वालों की गलतफहमी भी टी-20 के इस महानायक ने गुरुवार को वानखेड़े स्टेडियम में दूर कर दी। वेस्टइंडीज के खिलाफ सेमीफाइनल में कप्तान डैरेन सैमी ने टॉस जीतकर भारत को पहले खेलने का न्योता दिया तो क्या हुआ। 47 गेंदों में 89 रनों की पारी खेल कर कोहली ने दिखा दिया वह इस खेल के संपूर्ण पैकेज हैं। यह कोहली की ही पारी थी जिसने इस टी-20 वर्ल्ड कप में भारत को अपने सर्वोच्च स्कोर दो विकेट पर 192 रनों के योग तक पहुंचाया।

कोहली ही नहीं इस टूर्नामेंट में पहली बार धोनी एंड कंपनी ने टीम इंडिया बनकर बल्लेबाजी की। पहले रोहित शर्मा का बल्ला जमकर बोला। 31 गेंदों में तीन छक्कों की मदद से ताबड़तोड़ 43 रनों की उनकी पारी ने भारत के 50 रन 34 गेंदों में पूरे कर दिए। खराब फॉर्म के चलते टीम से बाहर किए गए शिखर धवन के स्थान पर बतौर ओपनर खेलने आए स्थानीय अजिंक्य रहाणे ने भी 35 गेंदों में 40 रन बनाए, लेकिन यह कोहली ही थे जिनकी काट न तो सैमुअल बद्री की फिरकी ढूंढ पाई और न ही कैरेबियाई पेस।

रनों का पीछा करते हुए कोहली का औसत टी-20 में 91.80 है, लेकिन पहले खेलते हुए उनका यही औसत 35.22 है। कोहली ने न सिर्फ इस औसत को झुठलाया बल्कि यह भी दिखला दिया उनमें क्रिकेट के हर मुकाम को छूने की कूवत है। उन्होंने धोनी के साथ तीसरे विकेट के लिए 27 गेंदों में 64 रन जोड़े। इसमें धोनी का योगदान महज 15 रनों का था। इन दोनों ने अंतिम 18 गेंदों में 42 रन जुटाए। बावजूद इसके भारत 200 के आंकड़े को पार नहीं कर पाया।
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